
Water harvesting
जबलपुर। गर्मी सीजन में तेजी से गिरे भूजल स्तर ने खतरे की घंटी बजा दी है। ऐसे में वर्षा जल को सहेजकर भूगर्भ में पहुंचाने को लेकर पर्यावरण प्रेमी आवाज उठा रहे हैं। सभी शासकीय कार्यालयों में वाटर हार्वेस्टिंग संरचना विकसित करने के लिए जिला प्रशासन ने विभाग प्रमुखों को सर्कु लर जारी कर दिया है। कलेक्टर भरत यादव ने स्पष्ट किया है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए भू जलस्तर बढ़ाने के लिए अविलम्ब आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने केंद्रीय व प्रदेश शासन के सभी विभागों को इस पर गम्भीरता से अमल करने निर्देशित किया है। अब इसे लेकर कार्यालय प्रमुखों की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
निर्देश पर पालन की होगी समीक्षा
कलेक्टर ने विभाग प्रमुखों को पत्र भी लिखा है। इसमें कहा है कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए परम्परागत तकनीक को अपनाकर वर्षा जल को चालू या बंद नलकूप में छोड़ा जा सकता है। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर वर्षा जल का संग्रहण कर भू जल स्तर को बरकरार रखने में सहयोग किया जा सकता है। उन्होंने इसके लिए नगर निगम की भवन शाखा से सम्पर्क करने के लिए कहा है। निजी भवन मालिकों को भी भू जल सम्वर्धन में योगदान देने कहा गया है। कलेक्टर ने कहा कि समीक्षा बैठकों के दौरान वे भू-जल सम्वर्धन की दिशा में विभागों के कार्यों की समीक्षा भी करेंगे।
ठेकेदारों की ली जाएगी मदद
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने के लिए जिला प्रशासन विकास कार्यों में संलग्न ठेकेदारों की भी मदद लेगा। इसके लिए कार्पोरेट रेस्पॉंसबिल्टी सर्विस (सीएसआर) का भी उपयोग किया जाएगा।
इनके पास वृहद परिसर
-800 शासकीय स्कूल भवन
-15 शासकीय कॉलेज भवन
-06 विश्वविद्यालय भवन
-90 के लगभग राज्य शासन के कार्यालय परिसर
-25 से ज्यादा केन्द्रीय शासन के कार्यालय परिसर
-04 डिफें स फै क्ट्री व उनसे सम्बद्ध अन्य इकाइयां
यहां भी व्यवस्था
-कलेक्ट्रेट व सभी तहसील कार्यालय परिसर
-निगम मुख्यालय व सभी जोन कार्यालय परिसर
यहां इंजीनियरिंग पास युवाओं ने उठाया वाटर हार्वेस्टिंग का बीड़ा
भू-जल स्तर में हो रही गिरावट को लेकर शहर के पर्यावरणविद् चिंतित हैं। बारिश का पानी सहेजने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसके लिए इंजीनियरिंग से स्नातक शहर के युवाओं ने वाटर हार्वेस्टिंग के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और शहरवासियों को जल संवर्धन के लिए जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने कहा, यदि बारिश का पानी नहीं सहेजा गया तो आने वाले वर्षों में भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ेगा।
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक चंद्रशेखर पटेल, अनमोल पटेल, प्रतीक कुमार, सुनील रजक वाटर हार्वेस्टिंग के लिए ड्रॉइंग-डिजाइन तैयार कर रहे हैं। वे एक हजार वर्ग फीट और इससे बड़ी टाउनशिप के लिए भी वाटर हार्वेस्टिंग की डिजाइन तैयार कर रहे हैं, जिससे लोगों को भवन के आकार के अनुपात में जल संवर्धन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए ड्रॉइंग उपलब्ध हो सके।
15 से 25 हजार रुपए का खर्च
इंजीनियर चंद्रशेखर ने बताया, एक हजार से 3 हजार वर्ग फीट में बने भवन जल संवर्धन संरचना विकसित करने में 15-25 हजार रुपए का खर्च आता है। इसके लिए गड्ढा खोदने, रेत, बजरी, पाइप और जाली की आवश्यकता होती है।
संस्थाओं के माध्यम से कर रहे प्रेरित
युवा इंजीनियरों ने कहा कि भू-गर्भीय जल के संरक्षण के लिए वे भावी इंजीनियरों के साथ ही स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्र-छात्राओं को भी इसके लिए जागरूक कर रहे हैं। शिक्षकों से भी अपने घरों में जल संवर्धन संरचना विकसित करने की अपील कर रहे हैं, जिससे बारिश का पानी व्यर्थ नहीं जाने पाए।
Published on:
24 Jun 2019 11:00 am
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