
what happens to your body when you do not get enough sleep
जबलपुर। अधिक स्ट्रेस लेने, वर्किंग आवर अधिक होने और नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों का स्लीपिंग टाइम अब कम होते जा रहा है। प्रॉपर नींद न लेना वर्तमान में बड़ी समस्या हो गई है। अनलिमिटेड मोबाइल चैटिंग, नेट सर्फिंग भी नींद के घंटों को कम कर रही है, क्योंकि हमारे उठने का टाइम तो फिक्स है, लेकिन रात में सोने का टाइम बिगड़ गया है। विशेषज्ञ अच्छी लाइफ जीने के लिए कम से कम आठ घंटे की नींद प्रतिदिन हर व्यक्ति को लेने की सलाह देते है।
इन प्रॉब्लम से घिरे
शहर में ज्यादातर लोग इस प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, क्योंकि स्टूडेंट्स लेट नाइट स्टडी कर रहे हैं, युवा मोबाइल में ज्यादा से ज्यादा टाइम स्पेंड कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग नाइट शिफ्ट में काम कर रहे हैं। इसका परिणाम चिढ़चिढ़ापन, कम नींद आना, इम्यून सिस्टम वीक होना जैसी प्रॉब्लम सामने आ रही हैं।
बायोलॉजिकल क्लाक बदली
लोगों की लाइफ स्टाइल के कारण उनकी बायोलॉजिकल क्लॉक बदल रही है। वे इसके हिसाब से सैट हो गए हैं, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं। निद्रा रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषि डाबर ने बताया कि लाइफ स्टाइल के कारण बायोलॉजिकल क्लॉक बदल गई है। जो लोग देर से सो रहे हैं और देर से उठ रहे हैं तो उन्हें सनलाइट नहीं मिल पा रही है। बॉडी को सनलाइट न मिलना भी बीमारी को आमंत्रित करना होता है।
कम नींद लेने से ब्रेन होता है सुस्त
स्लीप डिप्रवेशन से हमारे कॉगनेटिव फंक्शन प्रभावित होते हैं। ब्रेन का फ्रंट पार्ट स्लीप डैट को डील करता है। जब हम कम नींद लेते हैं तो ब्रेन सुस्त होता है। ब्रेन के रेस्पॉन्स करने की क्षमता प्रभावित होती है। ब्रेन की ओवरऑल प्रोडक्विटी कमजोर होती है। यही स्लीप डिप्रवाइजेशन कहलाता है। डॉ. कंचन ढ़ींगरा ने बताया कि जब हम स्ट्रेस में होते हैं या ड्रग लेते हैं तो मिलेटोनिन फंक्शन पर इफेक्ट होता है और नींद नहीं आती है।
कम नींद के नुकसान
ब्रेन सुस्त होता है।
चिढ़चिढ़ापन आता है।
मेंटल और फिजिकल थकान होती है।
डिसीजन पावर कम होती है।
ये कारण जिम्मेदार
देर रात तक चैटिंग करना
सोने से पहले चाय-कॉफी पीना
नाइट स्टडी
स्टे्रस लेना
नाइट शिफ्ट जॉब करना
क्या है सर्केडियन रिदम
यह शरीर की आंतरिक क्रिया है। मतलब शरीर के अंदर की २४ घंटे चलने वाली घड़ी है, जो सीधे मस्तिष्क से संबंधित एवं संचालित है। डॉ. साधना केशरवानी ने बताया कि इसे स्लीप एंड वेक साइकल भी कहते हैं। इसी चक्र के प्रभाव से हम रोज एक ही समय पर आलस्य या ऊर्जा, नींद आना और नींद खुल जाना जैसी घटना का अनुभव करते हैं।
Published on:
16 Mar 2018 01:30 pm
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