
Tilsani open cap jabalpur
जबलपुर. किसानों से खरीदे गए गेहूं के रखरखाव में हद दर्जे की लापरवाही सामने आई है। गोदामों में रखे गेहूं में कीड़े लग चुके हैं।कुंडम मार्ग में तिलसानी ओपन कैप में रखा गेहूं की हालत ऐसी है कि उसे जानवर भी नहीं खाएं। वह काला पड़ गया है। उसकी गंद दूर तक फैली है। इस पर जिम्मेदार एजेंसियों ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। ऐसे में लाखों रुपए का अनाज खराब हो गया। अब मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कारपोरेशन ने पुन: जांच शुरू की है। वह कुछ गोदामों को ब्लैक लिस्ट कर सकता है।
जिले में वर्ष 2018-19 और 2018-20 में भंडारित 21 हजार मीट्रिक टन गेहूं में कीड़े लग चुके हैं। उसे साफ कर खाने लायक बनाने की चेतावनी गोदाम संचालकों को मप्र राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने दी है। तब तक उनके भंडारण शुल्क पर रोक लगाई गई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि समय रहते ध्यान क्यों नहीं दिया गया। वेयरहाउसिंग कारपोरेशन और नागरिक आपूर्ति निगम के गुणवत्ता निरीक्षकों को नियमित जांच करना चाहिए। गोदाम संचालकों की लापरवाही भी सामने आई है।
तीन हजार रुपए आता है खर्च
समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के उपरांत उसे गोदाम और कैप में भंडारित किया जाता है। किसानों से समर्थन मूल्य पर इसे करीब 2 हजार रुपए प्रति क्विंटल में खरीदा जाता है। लेकिन परिवहन और गोदाम तक पहुंचते-पहुंचते एक क्विंटल की कीमत 26 सौ से लेकर 28 सौ रुपए तक पहुंच जाती है। फिर प्रति मीट्रिक टन 85 से 90 रुपए हर माह का भुगतान किया गया। इतना व्यय करने के उपरांत भी गेहूं की सुरक्षा नहीं की जा सकी। इससे शासन को करोड़ों रुपए की क्षति हो रही है।
गोदामों में रखे गेहूं की पुन: जांच की जा रही है। उनका किराया तो रोका गया है। जहां ज्यादा लापरवाही हुई है, उन गोदामों को आगामी समय के भंडारण के लिए ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।
एसआर निमोदा, जिला प्रबंधक, मप्र वेयरहाउसिंग कारपोरेशन
मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कारपोरेशन की तरफ से समय पर गोदाम नहीं खोले जाते हैं। ऐसे में देखरेख मुश्किल होती है। जिन गोदामों में गड़बड़ी पाई गई है, वहां तक कार्रवाई ठीक लेकिन दूसरे गोदामों का भंडारण शुल्क रोक लिया गया है।
सुशील शर्मा, अध्यक्ष, वेयर हाउस एसोसिएशन
Published on:
07 Feb 2023 12:07 pm
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