
Wheat
सरकार को चपत
इन दोनों जगहों पर रखे गेहूं की कीमत तीन करोड़ 40 लाख रुपए है। अब उसकी कीमत दो करोड़ 2 लाख रुपए मिल रही है। ठेकेदार ने नीलामी में अलग-अलग स्टेक का ऑफर डाला था। उसमें न्यूनतम 809 और अधिकतम 1400 रुपए प्रति क्विंटल दर रखी है। यानी सीधे तौर पर 3 सौ से लेकर एक हजार रुपए तक का घाटा सरकार को हुआ है। ओपन कैप में अनाज का उठाव समय पर किया जाना चाहिए। लेकिन इसे नजरअंदाज किया जाता है। गेहूं और धान जानवरों के खाने के लायक भी नहीं है। बरखेड़ा और तिलसानी ओपन कैप के अलावा बरेला में बने ओपन कैप में भी 500 मीट्रिक टन गेहूं का भंडारण किया गया है। उसकी नीलामी भी जल्दी होगी। वह भी खाने के लायक नही बचा है। इस गेहूं को वर्ष 2019- 20 में खरीदा गया था।
दवा का छिड़काव नहीं
मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन ने जिले गोदामों में गेहूं का भंडारण कराया था। इसमें वर्ष 2018-19 का 13 हजार 950 मीट्रिक टन तो वर्ष 2019-20 का 5 हजार मीट्रिक टन गेहूं शामिल है। यह गेहूं अब खराब हो गया है। इसकी कीमत 33 करोड़ रुपए है। वर्ष 2018-19 में प्रति क्विंटल कीमत 1735 थी तो वर्ष 2019-20 में सरकार ने किसानों को 1840 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य दिया था। अब यह खराब हो गया है। नीलामी में सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली फर्म अब कितनी कीमत में इसे खरीदेगी, यह समय बताएगा।
दिलीप किरार, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम का कहना है कि ओपन कैप में खराब हुए गेहूं की नीलामी की जा चुकी है। उसकी अच्छी कीमत मिली है। जो वेयर हाउस में खराब हुए गेहूं की रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है। जांच दल इसकी जांच करेगा। जितना हिस्सा खराब है उसकी नीलामी की प्रक्रिया होगी।
दल करेगा जांच
वेयरहाउस में भी अनाज सुरक्षित नहीं है। वेयरहाउस संचालकों के अलावा मप्र वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कारपोरेशन और मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने के कारण 33 करोड़ रुपए मूलय का गेहूं खराब हो गया है। सिविल सप्लाई कारपोरेशन ने इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। अब एफसीआइ के अलावा दूसरे विभागों का दल इसकी जांच करेगा। उसके बाद खराब गेहूं की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी।
Published on:
10 Aug 2023 06:06 pm

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