जबलपुर। बेसहारा और गरीबों की मदद करने वाली मदर टेरेसा को वेटिकन सिटी में संत की उपाधि दी गई। हालाकि लोग पहले से ही उन्हें संत तुल्य मानते थे। संत मदर टेरेसा से मिल चुके रमेश शर्मा बताते हैं कि मदर टेरेसा जब जीवित थीं, तो उन्होंने जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर मानवता की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने गरीब, नि:सहाय, अनाथों के बीच प्रेम व सेवा में खीस्त के दर्शन पाए। यही वजह थी कि मदर टेरेसा ने ममता और अपनत्व की छांव में कुष्ठ रोग से ग्रसित वैसे लोगों के जख्मों की सफाई कर मरहम-पट्टी कर उनका पुर्नवास कराया, जिन्हें परिजनों द्वारा छोड़ दिया गया था। शर्मा की जान भी उन्होंने ही बचाई थी।