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इस्तीफा देने वाले अब नहीं हैं विधायक, कैसे बनाया मंत्री?

हाइकोर्ट ने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री, विस अध्यक्ष व 14 मंत्रियों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

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Whose legislature was lost, how did he become a minister?

Whose legislature was lost, how did he become a minister?

जबलपुर. मप्र हाइकोर्ट ने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री, विस अध्यक्ष सहित 14 मंत्रियों से पूछा कि विधायक पद से इस्तीफा देने के बावजूद इन्हें मंत्री कैसे बना दिया गया? एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय यादव व जस्टिस राजीव कुमार दुबे की डिवीजन बेंच ने सामान्य प्रशासन विभाग, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, राज्यपाल के सचिव, राष्ट्रपति के कैबिनेट सचिव, भारत निर्वाचन आयोग व मंत्रियों तुलसीराम सिलावट, बिसाहूलाल सिंह, ऐदल सिंह कंसाना, गोविंद सिंह राजपूत, इमरती देवी, डॉ. प्रभुराम चौधरी, डॉ. महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, हरदीप सिंह डंग, राज्यवर्धन सिंह, विजेंद्र सिंह यादव, गिरिराज दंडोतिया, सुरेश धाकड़ व ओपीएस भदौरिया को नोटिस जारी किए। सभी से 14 दिसम्बर तक जवाब मांगा गया।
छिंदवाड़ा निवासी वकील आराधना भार्गव की ओर से यह याचिका दायर की गई। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने तर्क दिया कि कांग्रेस की निर्वाचित सरकार गिराने के लिए मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में साजिश रची गई। इसके तहत 22 कांग्रेस विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। बाद में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इनमें से 14 को मंत्री बना दिया।
विशेष परिस्थिति भी नहीं
कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मंत्री बनाए जाने के लिए विधायक होना जरूरी है। लेकिन, उक्त 14 मंत्रियों में से कोई भी विधायक नहीं है। विशेष परिस्थितियों में मुख्यमंत्री किसी विद्वान, किसी विषय विशेष के विशेषज्ञ या ऐसे किसी व्यक्तिको, जिसे मंत्री बनाया जाना आवश्यक हो, मंत्री नियुक्तकर सकता है। लेकिन, प्रदेश में ऐसी परिस्थितियां न होने के बावजूद मनमानी तरीके से उक्त14 लोगों को विधायक न होते हुए भी मंत्री बना दिया गया। तर्क दिया गया कि जिन लोगों ने खुद विधायक रहना नहीं चाहा और जनता के चुने हुए पद से इस्तीफा दे दिया, उन्हें मंत्री बनाया जाना संविधान के अनुच्छेद 164 का उल्लंघन है। विशेष परिस्थितियां भी एक या दो लोगों के लिए हो सकती हैं, 14 लोगों के लिए एक साथ नहीं।
40 फीसदी मंत्री विधायक नहीं
कुल 32 मंत्री बनाए गए हैं, इनमें से 14 अर्थात 40 फीसदी मंत्री विधायक ही नहीं हैं। यह संविधान का मजाक है।
आग्रह किया गया कि असंवैधानिक तरीके से नियुक्तइन 14 मंत्रियों को हटाया जाए। साथ ही संविधान की मंशा के खिलाफ जाकर मनमानी करने के लिए वर्तमान बीजेपी सरकार को भी बर्खास्त किया जाए। प्रारम्भिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका में बनाए गए अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।