
wild animal in city india
जबलपुर। गर्मी में वन्य प्राणी पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों पहुंच रहे हैं। वन्य जीवों की प्यास बुझाने वन विभाग के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। पानी की तलाश में वन्य जीव ग्रामीण आबादी में आ जाते हैं। ऐसे में वे कुत्तों का शिकार बन जाते हैं या फिर सडक़ दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं। वन परिक्षेत्र सिहोरा के अंतर्गत पिछले डेढ़ माह माह में अलग-अलग हादसों में करीब तीन से चार वन्य प्राणियों की मौत हो चुकी है। गर्मी में इन क्षेत्रों में पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
about-
- आए दिन दुर्घटना के शिकार हो रहे वन्य प्राणी
- वन परिक्षेत्र सिहोरा का मामला : सघन क्षेत्रों में नहीं है पानी का इंतजाम,
- पानी की तलाश में भटकर पहुंच रहे बस्ती में, कुत्तों और वाहनों की चपेट में आ रहे
अप्रैल और मई माह में आसपास के पानी के स्रोत सूख जाते हैं। पानी की तलाश में वन्य प्राणी वनों से सटे गांवों में पहुंच जाते हैं, जिनसे उनकी मौत हो रही है। जल स्रोत सूखने पर वन विभाग को वन्य जीवों के लिए पानी के इंतजाम करना चाहिए। लेकिन इसको लेकर वन विभाग गंभीर नहीं है। विभाग ने गौरहा बीट में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पांच गड्डे खुदवाए तो जरूर, लेकिन सिर्फ एक में थोड़ा पानी है, बाकी गड्डे सूखे पड़े हैं। सरदा में भी कुछ ऐसे ही हाल हैं।
वन विभाग को लिखा था पत्र : मझौली क्षेत्र के जनपद सदस्य आशाराम राजपाल ने वन विभाग को पत्र लिखा था। उन्होंने गौरहा के जंगल में सूखते जलस्रोतों के कारण हिरण, चीतल, सांभर के मरने की बात कही थी। वन विभाग से पीने के पानी की वैकल्पिक करने कहा था, लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। पानी की तलाश में वन जीव बेमौत मारे जा रहे हैं।
खास-खास
- वन परिक्षेत्र सिहोरा में आती हैं 15 बीटें
- चीतल, सांभर, हिरण वन्य प्राणियों की संख्या अधिक
- खरगोश, कबरबिज्जू, हिरण, भेडिय़ा भी हैं वन क्षेत्र में
- पिपरसरा, ढ़मढ़मा, मढ़ई, गिदुरहा, गौरहा में वन्य प्राणी अधिक
इनका कहना
जहां पानी के स्रोत हैं, वहां वन्य प्राणियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। वन विभाग को दो से चार हजार फंड मिलता है, उसी में सबकुछ करना पड़ता है। समय-समय पर शासन को प्रस्ताव भेजा जाता है।
- लोकप्रिय भारती, अनुविभागीय अधिकारी वन सिहोरा
Published on:
10 May 2018 01:16 pm
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