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घर के किचन में कुंडी मारकर बैठे थे 50 दांत वाले नागराज

नेपियर टाउन में हुई घटना, लुप्त प्रजाति में आ रहा वुल्फ स्नेक  

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जबलपुर । नेपियर टाउन में रहने वाले नायक परिवार के किचन में घुसे सांप को पकड़ा गया, तो वह वुल्फ स्नेक निकला। यह विलुप्तप्राय प्रजातियों में से एक है। इसके 50 दांत होते हैं। सूचना पर पहुंचे सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे ने बर्तनों के स्टैंड में बैठे सांप को आधे घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ लिया।

गनेता भी इसका नाम
पकड़े गए सांप को गनेता भी कहा जाता है। हालांकि, यह जहरीला नहीं होता। इसके दांत आरी जैसे नुकीले होते हैं। इसकी पकड़ इतनी मजबूत होती है, जो शिकार इसकी पकड़ में आता है, वो दोबारा इसके मुंह से नहीं छूट पाता। दुबे ने बताया कि भले यह सांप जहरीला नहीं हो, पर अन्य सांपों की तरह यह डरता नहीं है, अगर इसके साथ छेड़खानी की जाए तो यह पीछे ना हटते हुए तुरंत ही हमला कर जवाब भी देता है। इस वुल्फ स्नेक का प्रिय भोजन छिपकली, मेंढक और चूहे हैं। यह घरों की दीवार पर भी आसानी से चढ़ जाता है। बारिश के समय इसका ठिकाना दीवारें या फिर बिल होते हैं, जहां इसे आसानी से भोजन मिल जाता है।

कम होते जा रहे हैं वुल्फ स्नेक
इंग्लिश में वुल्फ स्नेक और हिंदी में गनेता के नाम से जाना जाने वाला यह सांप प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। चूहे, छिपकली, मेंढक खाकर यह सांप प्रकृति को संतुलन में रखता है, हालांकि धीरे-धीरे इन सांपों की संख्या में कमी भी जरूर आ रही है। गजेंद्र दुबे ने बताया कि लोग सांप को देखते ही मार डालते हैं, हालांकि ये जहरीला नहीं होता है।

वाहन के चके में फंसा सांप
सूपाताल रामायण मंदिर के सामने बाडी मेकर की दुकान में शाम 7.30 बजे एक पिक अप वाहन सुधरने आया था। मैकेनिक सुहैल भाईजान ने जैसे ही वाहन को देखा तो वाहन के पिछले चके में एक सांप प्रवेश कर फंसा था। आनन फानन में स्थानीय शुभम पचौरी ने सर्प विशेषज्ञ दुबे को सूचना दी, जिन्होंने पहुंचकर रेस्क्यू करते हुए सांप को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। उक्त सांप ट्रिंकेट प्रजाति का था जिसे अलंकार सांप कहते हैं।