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#Workshop जैव विविधता को बचाने गेहूं और चावल के दानों से बनाई रंगोली

#Workshop जैव विविधता को बचाने गेहूं और चावल के दानों से बनाई रंगोली

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जबलपुर. जीवों और वनस्पतियों की विभिन्न प्रजातियों से ही जैव-विविधता है। इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। तेजी से बढ़ती जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण आदि के चलते अब जैव विविधता पर संकट पैदा हो गया है। यदि इस पर अभी से ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम देखने होंगे। अब हमें जैव-विविधता को सहेजना की दिशा में काम करना होगा। ये बातें रानी दुर्गावती में कृषि विभाग में जैव विविधता दिवस पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कहीं।

पशु-पक्षी, जीव-जंतुओं के लिए भी आवश्यक

प्रोफेसर एसएस संधू ने कहा कि जैव विविधता मानव ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी, जीव जंतुओं के लिए भी उतनी ही आवश्यक है। इसके बिगडने से प्रकृति का संतुलन प्रभावित हो रहा है। संरक्षण के साथ लक्ष्य भी निर्धारित करना होगा। जैव विविधता को बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है। सतत् विकास के साथ जलवायु परिवर्तन जैव विविधता से जुड़े हुए हैं। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रकृति के इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए बायो डायवर्सिटी आवश्यक है। इसके बिगड़ने से इकोसिस्टम खतरे में पड़ सकता है।

पृथ्वी को बचाने का दिया संदेश
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने अनाज के दानों से जैव विविधता का प्रदर्शन किया। गेहूं -चावल से रंगोली बनाई। पोस्टर प्रदर्शनी में जैव विविधता को रेखांकित किया और पृथ्वी को बचाने का संदेश दिया। इस दौरान निबंध लेखन प्रतियोगिता हुई। डॉ. दिव्या सिंह, डॉ. अजय मिश्रा डॉ दीपेंद्र सिंह राजपूत, डॉ. राजेश आर्वे, डॉ. श्वेता तिवारी, भावना यादव, डॉ. अर्पणा शर्मा, डॉ. संस्कला पटेल मौजूद थे।