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World Ramayana Conference 2026 में लुभा रहीं श्रीराम की 36 शैलियों में तैयार 36 कलाएं

World Ramayana Conference 2026 : संस्कारधानी में मंगलवार से शुरू हो रही वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस 2026 की प्रदर्शनी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां लगी प्रदर्शनी में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की &6 शैलियों में तैयार की गई पेंटिंग्स दर्शकों को लुभा रही हैं।

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World Ramayana Conference 2026

World Ramayana Conference 2026

  • अलवर, मेवाड़, पटुआ, चेरीयालपट्म, केरला म्यूरल, बुंदेली समेत देश के विभिन्न रा’यों की कलाएं शामिल हैं
  • फिनिशिंग और चित्रकारी ऐसी कि देखते ही बन रहीं पेंटिंग

World Ramayana Conference 2026 : संस्कारधानी में मंगलवार से शुरू हो रही वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस 2026 की प्रदर्शनी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां लगी प्रदर्शनी में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की &6 शैलियों में तैयार की गई पेंटिंग्स दर्शकों को लुभा रही हैं। इस विशेष प्रदर्शनी में देशभर के विभिन्न रा’य व क्षेत्रों की कला शैलियों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। जिसमें हर शैली में भगवान श्रीराम के जीवन के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। महावीर में जहां उनका पराक्रम दिखाया गया है तो आज्ञा पालक में एक पुत्र का पिता के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा रामायण के सभी प्रमुख कांड और अध्याय को इन पेंटिंग में देखा जा सकता है।

World Ramayana Conference 2026 : 36 शैलियों में दर्शाईं 36 कलाएं

प्रदर्शनी प्रभारी शैलजा सुल्लेरे ने बताया प्रदर्शनी में श्री रामचंद्र जी पथ गमन न्यास, संस्कृति विभाग के चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया है। इनकी खासियत है कि ये देश के विभिन्न रा’यों की शैलियों पर आधारित हैं। श्री रामचंद्र जी पथ गमन न्यास की 36 पेंटिंग 36 श्लोकों पर आधारित भगवान राम की 36 कलाओं पर आधारित हैं। हर पेंटिंग एक अलग ही शैली में तैयार की गई है। हर कला की पेंटिंग अपने आप में पूरे श्लोक का संपूर्ण चित्रण करती हुई दर्शाई गई है।

World Ramayana Conference 2026 : ये कलाएं दर्शाईं

पेंटिंग में जनप्रिय, आज्ञा पालक, ऋषियों के प्रति श्रद्धा, वास्तु विद्या में निपुण, संबंध प्रिय, धर्म रूप, मातृ पितृ भक्त, धर्म रक्षक, दृष्टिप्रतिज्ञ, विनयवान, समदृष्टा, दुष्टों को दंड के समर्थक, शत्रु नाशक, उद्धारक, प्रशंसक, महा पराक्रमी, नीति निर्धारक, विवेकवान, अंतरदृष्टि संपन्न, क्षमावान, नीतिवान, न्यायरूप, अभय रूप, रणनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ, महावीर, कृपालु, कालरूप, वात्सल्य पूर्ण, महाविनाशक, उदार रूप, वचन पालक, लोकचित के रक्षक, सहृदयी, असाधारण प्रकृति प्रेमी, कृतज्ञ कलाएं शामिल हैं। कलाकारों ने भगवान श्रीराम के रूप और उनके विभिन्न कार्यों को इतने प्रभावशाली तरीके से चित्रित किया कि पेंटिंग्स जीवंत प्रतीत हो रही हैं।

World Ramayana Conference 2026 : इन शैलियों का समावेश

मेवाड़ लघु चित्र, बूंदी लघु चित्र, किशनगढ़ मिनिएचर, कोटा मिनिएचर, जयपुर मिनिएचर, बीकानेर मिनिएचर, मारवाड़ मिनिएचर, आमिर मिनिएचर, अलवर मिनिएचर, शेखावाटी मिनिएचर, देवगढ़ मिनिएचर, नागौर मिनिएचर, नाथद्वारा मिनिएचर, उदयपुर मिनिएचर, सिरोही मिनिएचर, गंजीफा कर्नाटक, मैसूर, विजयनगर, बुंदेली कलम मप्र, चेरियालपट्म आंध्र प्रदेश, पटुआ पश्चिम बंगाल, केरला म्यूरल, कलमकारी आंध्र प्रदेश, मातानी पछेड़ी गुजरात, लोक कला उप्र, नायका तमिलनाडु, फड़ राजस्थान, उडिय़ापट्ट उड़ीसा, गोंड जनजाति मप्र, चित्रकशी महाराष्ट्र, मधुबनी बिहार, बसौली हिमाचल प्रदेश, गुलेर मिनिएचर हिमाचल प्रदेश, भील जनजाति मप्र, तंजावुर तमिलनाडु शैली में 36 कलाएं प्रदर्शित की गई हैं।

World Ramayana Conference 2026 : प्रदर्शनी में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को शैलियों के माध्यम से दर्शाया गया, जैसे कि राम का वनवास, सीता हरण, रावण वध, और श्रीराम का राजतिलक। प्रत्येक कला रूप ने रामकथा को अपनी स्थानीय सांस्कृतिक दृष्टि से प्रस्तुत किया, जिससे दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की विविधता का अनुभव देखने मिल रहा है।

  • डॉ. अखिलेश गुमाश्ता, संयोजक, वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस 2026