
world violin day: 13 december news
जबलपुर . पुरानी फिल्मों के अधिकांश गानों में वायलिन का प्रयोग किया जाता था। यही नहीं फिल्मों के बैक ग्राउंड म्यूजिक में भी इसका भरपूर इस्तेमाल किया जाता था। सच तो यह है कि फिल्मी गीतों में या बैक ग्राउंड म्यूजिक में उदासी का पुट बिना वायलिन के आ ही नहीं सकता। वायलिन एक एेसा इंस्ट्रुमेंट है, जिसमें फोक म्यूजिक से लेकर फिल्मी और वेस्टर्न धुन निकाली जा सकती है।
कमी है सिखानेवालों की
शायद यही वजह है कि शहर के युवाओं को वायलिन सीखना पसंद आ रहा है, लेकिन शहर में वायलिन टीचर्स की कमी है। शहर के एक सरकारी एवं कुछ प्राइवेट इंस्टीट्यूशन में वाइलिन सिखाया जाता है। यहां से कुछ वायलिनिस्ट भी निकले हैं, जो कि देश के कई नामी संगीत विवि में सेवाएं दे रहे हैं और युवाआें को वायलिन सिखा रहे हैं।
कॅरियर की राह है इसमें
वायलिन सीखने वालों के लिए यह क्षेत्र कई संभावनाओं से भरा है। कारण यह है कि मुम्बई जैसे शहर में वायलिनिस्ट आसानी से अपना कॅरियर बना सकते हैं। इसके साथ ही कई स्कूलों में वायलिन टीचर्स अपॉइंट किए जाते हैं। एेसे में इस क्षेत्र में एक अच्छा कॅरियर भी है।
स्कूलों में क्लासेस
शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों में वायलिन सिखाया जाता है। दिव्या वाजपेयी ने बताया कि उनके स्कूल में एनुअल फंक्शन के दौरान कई स्टूडेंट्स वायलिन बजाते हैं। उन्हें स्कूल में सिखाया जाता है। म्यूजिक से जुड़ी फेसेलिटी शहर के ज्यादातर बोर्डिंग स्कूलों में है।
मानकुंवर बाई कॉलेज में रोजाना क्लास
शहर में एकमात्र सरकारी म्यूजिक विभाग है, जो कि मानकुवंर बाई कॉलेज में है। यहां पर फस्र्ट से लेकर थर्ड ईयर तक सभी वाद्ययंत्र बजाना सिखाया जाता है। प्रो. राजीव जैन ने बताया कि अब एमए में भी वायलिन को प्रपोज्ड कर दिया गया है। जल्दी ही यह यहां शुरू किया जा सकता है। जबलपुर से बसंत रानाडे, अरुण वकील वायलिनिस्ट हुए, जो कि खैरागढ़ सहित अन्य जगहों पर वायलिन प्ले करना सिखाया।
Published on:
13 Dec 2017 03:13 pm
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