
मांई की डोली को फूलरथ पर सवार किया, आंगा देव भी साथ चले
इससे पहले फूल रथ की अंतिम परिक्रमा पूरे धूमधाम से सपन्न हुई। इसके बाद नए बनाए गए दो मंजिला 8 चक्काें के रथ में मांई दंतेश्वरी की डोली को पूरे रस्म-रिवाज के साथ मुख्यद्वार (दंतेश्वरी मंदिर सिंह द्वार) के सामने से डोली को रथारुढ़ किया गया। इसके पूर्व पूरे सम्मान के साथ मांईजी की डोली को से सलामी दी गई। मांई की डोली जैसे ही रथ पर सवार हुई। उसके बाद रस्म के हिसाब से इसे चुराने की परंपरा का निर्वहन किया गया।रथ चुराने के लिए किलेपाल, गढ़िया एवं करेकोट परगना के 55 गांवों से सैकड़ो ग्रामीण यहां पहुंचे थे। रातोरात ग्रामीणों ने इस रथ को खींचकर करीब पांच किमी दूर कुम्हड़ाकोट के जंगलों में ले गए। रथ को यहां पेड़ों के बीच में छिपा दिया गया। रथ चुराकर ले जाने के दौरान रास्ते भर उनके साथ आंगादेव सहित देवी-देवता भी साथ रहे।
बाहर रैनी में आज रथ लेने पहुंचेंगे राजकुमार कमलचंद्र भंजदेव
इधर रथ चोरी होने के बाद अब बुधवार को राजकुमार कमलचंद्र भजदेव, राजगुरू नवीन ठाकुर अन्य लोगों के साथ कुम्हडाकोट पहुंचेंगे। यहां पहले नए फसल के अनाज को ग्रामीणों के साथ पकाने के बाद इसका भोग राजपरिवार के सदस्य करेंगे। इसके बाद चोरी हुए रथ को वापस लाने के लिए ग्रामीणों को मनाया जाएगा। देर शाम रथ को बस्तर महाराज अपनी अगुवाई में लेकर वापस दंतेश्वरी मंदिर पहुंचेंगे। रथ को वापस लाने की रस्म को बाहर रैनी रस्म भी कहा जाता है।
डायवर्ट रहे एक दर्जन मार्ग, बिजली आपूर्ति भी रही ठप
ग्रामीणों ने देर रात रथ चुराकर गुरूनानक चौक से होते हुए पहले मेन रोड लाया। यहां से रथ को कोतवाली होते हुए लालबाग मैदान से कुम्हड़ाकोट ले जाया गया। इस दौरान पूरे रास्ते में ट्रैफिक को करीब एक दर्जन स्थानों पर डायवर्ट किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए हर चौक पर हथियारबंद जवानों के साथ पुलिस अफसरों की तैनाती की गई थी। रथ जब मेन रोड पर पहुंचा तो एहतियातन बिजली की आपूर्ति ठप कर दी गई थी। देर रात रथ खींचकर कुम्हड़ाकोट में पहुंचाया गया।
Published on:
24 Oct 2023 11:22 pm

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