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एस्सार की 267 किमी लंबी स्लरी पाइप लाइन पर अब आर्सेलर मित्तल निप्पॉन का कब्जा, आज बदल जाएगा मालिकाना हक

बैलाडिला से विशाखापट्टनम तक 267 किमी लंबी दोहरी पाइप लाइन स्लरी परियोजना विश्व की दूसरी सबसे लंबी परियोजना है।

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एस्सार की 267 किमी लंबी स्लरी पाइप लाइन पर अब आर्सेलर मित्तल निप्पॉन का कब्जा, आज बदल जाएगा मालिकाना हक

एस्सार की 267 किमी लंबी स्लरी पाइप लाइन पर अब आर्सेलर मित्तल निप्पॉन का कब्जा, आज बदल जाएगा मालिकाना हक

जगदलपुर. किरंदूल स्थित एस्सार स्टील की स्लरी पाइप लाइन परियोजना जो कि बैलाडिला से विशाखापट्टनम तक 267 किमी लम्बी है। इसका मालिकाना हक सोमवार १६ दिसम्बर से बदल जाएगा। अब यह परियोजना आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के नाम से जानी जाएगी।

किरंदुल में इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है। प्लांट से एस्सार के नाम का बोर्ड उखाड़ दिया गया है। नई कंपनी का बोर्ड लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके साथ -साथ एस्सार स्टील के ओडि़शा की दाबुना- पारादीप पाइप लाइन , गुजरात का हजीरा स्टील प्लांट, विशाखापट्टनम स्थित एस्सार पैलेट प्लांट तथा पूना स्थित एस्सार संस्थान नई कंपनी का हिस्सा बनेगें। इस बाबत आर्सेलर मित्तल निप्पॉनस्टील के अधिकारियों के रविवार को बस्तर पहुंचने की संभावना है। इसको लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हंै। महत्वपूर्ण है कि एस्सार स्टील का ५४ हजार करोड़ के एनपीए के चलते बैंकों ने अपना पैसा निकालने एस्सार स्टील के पांच संस्थानों की नीलामी की थी। जिसे आर्सेलर मित्तल निप्पॉन ने 48 हजारकरोड़ में ले ली है। जबकि इनका मूल्यांकन लगभग एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का आंका गया है।

विश्व की दूसरी सबसे लंबी परियोजना
बैलाडिला से विशाखापट्टनम तक २६७ किमी लंबी दोहरी पाइप लाइन स्लरी परियोजना विश्व की दूसरी सबसे लंबी परियोजना है। इसके निर्माण को लेकर एस्सार स्टील व एनएमडीसी के मध्य १९९५ से १९९७ तक बातचीत हुई और फिर आठ वर्षों में यह परियोजना २००५ में कमीशन हुई थी। इस परियोजना की पाइप लाइन धुर नक्सल प्रभावित क्ष्ेात्रों से होकर गुजरती है। यह ऐसी परियोजना है जिसमें पाइप लाइन जमीन के अंदर होने के साथ-साथ किसान उपर के हिस्से में खेती भी कर रहे है।

आठ मिलीयन टन की क्षमता की है परियोजना
ए नएमडीसी के लौह अयस्क उत्खनन के दौरान बचा फाइनओर के ढेर आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैला रहा था। यह ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था। तब ग्रामीणों की शिकायत पर पर्यावरण विभाग ने एनएमडीसी पर जब शिकंजा कसा तो एनएमडीसी को ज्ञात हुआ कि फाइनओर से स्टील बनाने की तकनीक एस्सार स्टील के पास है तब एनएमडीसी के बुलावे पर एस्सार स्टील ने 1995 से यह परियोजना का कार्य प्रारंभ किया। इस तकनीक से एनएमडीसी फाइनओर से भी मुनाफा कमाने लगा, साथ ही प्रदूषण से भी मुक्ति मिली। फाइनओर परिवहन की लागत न्यूनतम एस्सार स्टील बैलाडीला से पानी के प्रेशर से फाइनओर पाइप के द्वारा विशाखापट्टनम भेजा जाता है। इस परिवहन में न्यूनतम लागत आती है। वहीं विशाखापट्टनम में एस्सार प्लांट में फाइनओर पैलेट में परिवर्तित कर शिप से गुजरात के हजीरा स्थित स्टील प्लांट में भेजा जाता है जहां पैलेट से स्टील बनाया जाता है।