17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चंदन जात्रा पूजा विधान के साथ बस्तर गोंचा पर्व का हुआ आगाज

जगदलपुर . बस्तर गोंचा पर्व चंदन जात्रा पूजाविधान के साथ प्रारंभ हो चुका है। चंदन जात्रा पूजा विधान में शताब्दियों (613 वर्षों) से चली आ रही परंपरानुसार भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बलभद्र स्वामी के विग्रहों की पूजा अर्चना के बाद श्रीमंदिर के गर्भगृह के आसन से नीचे उतारा गया। मंगलवार को ग्राम आसना में स्थापित भगवान शालिग्राम को श्रीश्री जगन्नाथ मंदिर में लाकर स्थापित किया गया ।

2 min read
Google source verification
Bastar Goncha

15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बलभद्र के नहीं होंगे दर्शन।


देवशयनी एकादशी के साथ होगा बस्तर गोंचा पर्व का परायण

इसके बाद इंद्रावती नदी की पूजा-अर्चना के साथ नदी के जल को लाकर भगवान शालिग्राम एवं जगन्नाथ स्वामी, बहन सुभद्रा और बलभद्र स्वामी के विग्राहों को चंदन जात्रा पूजा विधान के तहत विधि विधान के साथ 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के ब्राह्मणों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। भगवान जगन्नाथ स्वामी, बहन सुभद्रा और बलभद्र स्वामी का श्रीमंदिर में 15 दिनों तक दर्शन नहीें हो पायेगा ।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंदन जात्रा पूजा विधान के पश्चात भगवान जगन्नाथ का 15 दिवसीय अनसर काल की अवधि होती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ होते हैं तथा भगवान के अस्वथता के हालात में दर्शन वर्जित होते हैं। भगवान जगन्नाथ के स्वास्थ्य लाभ के लिए औषधियुक्त भोग का अर्पण कर भगवान जगन्नाथ की सेवा 15 दिनों के अनसर काल में 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सेवादारों एवं पंडितों के द्वारा किया जायेगा। औषधियुक्त भोग के अर्पण के पश्चात इसे श्रधालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। विशेष औषधियुक्त प्रसाद का पूण्यलाभ श्रद्धालु अनसर काल के दौरान जगन्नाथ मंदिर में पहुंचकर प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन दर्शन वर्जित होगा। देवशयनी एकादशी पूजा विधान के साथ इसका परायण होगा

इस दौरान बस्तर गोंचा महापर्व समिति के दीनदयाल जोशी, गजेन्द्र पाणिग्राही, रविंद्र पांडे, हेमंत पांडे, सुदर्शन पाणिग्राही, आत्माराम जोशी, नरेंद्र पाणिग्राही, राकेश पांडे, दिलेश्वर पांडे, मिथलेश पाणिग्राही, मिनेश पाणिग्राही, देवशंकर पंडा, बनमाली पाणिग्राही, अजय जोशी, वेणुधर पाणिग्राही, प्रशांत पाणिग्राही, श्रीमती आशा आचार्य, श्रीमती बसंती पांडे, गिरजा पांडे, नेत्रकांत आचार्या, कमलाकांत जोशी, हेमंत पानीग्राही, आशू आचार्य, वैभव पांडें, भूपेश पानीग्राही, प्रदीप पाढ़ी, हर्ष पानीग्राही, आकाश, मनीष, राहुल पांडे, मोहित, कृष्णा पानीग्राही, एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

- गोंचा महापर्व के विधानबस्तर गोंचा महापर्व में 30 जून को नेत्रोत्सव पूजा विधान, 1 जुलाई को श्रीगोंचा रथयाात्रा, 4 जुलाई को अखंड रामायण पाठ, 5 जुलाई को हेरापंचमी पूजा विधान, 6 जुलाई को नि:शुल्क सामूहिक उपनयन संस्कार एवं छप्पनभोग का अर्पण, 9 जुलाई को बाहुड़ा गोंचा पूजा विधान और 10 जुलाई को देवशयनी पूजा विधान संपन्न होगा।