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देश में पहली बार एलजीबीटीक्यू पर बस्तर की बेटी शालिनी ने की पीएचडी

CG Jagdalpur news : डॉ. शालिनी ने इस विषय पर पीएचडी कर बस्तर का मान बढ़ाया है। उन्हें पिछले महीने ही 18 तारीख को पीएचडी अवार्ड हुआ है। उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से द नीड ऑफ जेंडरन्यूट्रल रेप लॉ पर अपनी पीएचडी पूरी की है।

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देश में पहली बार एलजीबीटीक्यू पर बस्तर की बेटी शालिनी ने की पीएचडी

देश में पहली बार एलजीबीटीक्यू पर बस्तर की बेटी शालिनी ने की पीएचडी

CG Jagdalpur news : बस्तर की बेटी शालिनी द्विदी ने एलजीबीटीक्यू जैसे गंभीर मुद्दे पर अपनी पीएचडी पूरी कर ली है। देश में पहली बार किसी व्यक्ति ने इस विषय को अपनी पीएचडी के लिए चुना है। आमतौर पर लोग इस विषय पर बात करने से भी बचते हैं लेकिन डॉ. शालिनी ने इस विषय पर पीएचडी कर बस्तर का मान बढ़ाया है। उन्हें पिछले महीने ही 18 तारीख को पीएचडी अवार्ड हुआ है। उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से द नीड ऑफ जेंडरन्यूट्रल रेप लॉ पर अपनी पीएचडी पूरी की है। डॉ. शालिनी जगदलपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता आशुतोष द्विवेदी भी शहर के मशहूर अधिवक्ता हैं। डॉ. शालिनी ने पत्रिका से बात करते हुए बताया कि साल 2018 में उन्होंने जे योगानंदम लॉ कॉलेज रायपुर की प्रोफेसर डॉ. विनीता अग्रवाल के अंडर में अपने रिसर्च की शुरुआत की थी। वे बताती हैं कि साल 2018 में ही सुप्रीम कोर्ट ने एलजीबीटीक्यू पर निर्णय देते हुए इस कम्युनिटी को वैध करार दिया था।

इसके बाद ही उनके मन में आया कि इस विषय पर पीएचडी की जानी चाहिए। वे कहती हैं कि इस कम्युनिटी के साथ होने वाले अन्याय को देखते हुए उन्होंने इस विषय को चुना। डॉ.शालिनी बताती हैं कि जब उन्होंने पीएचडी की शुरुआत की तब वे कलिंगा यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। इस विषय पर शोध करने में उन्हें बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन अंतत: पांच साल में उनकी पीएचडी पूरी हो गई। डॉ. शालिनी कहती हैं कि पीएचडी पूरी करने के दौरान उनके माता-पिता भाई समेत उनकी गाइड डॉ. विनीता अग्रवाल और पति अनुज पांडेय के साथ ही ससुराल के लोगों का पूरा सहयोग मिला।

कम्युनिटी के साथ जो हो रहा था उसे देख व्यथित थी

डॉ. शालिनी बताती हैं कि एलजीबीटीक्यू यानी लेस्बबियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के साथ जो हो रहा था उसे देख वे काफी व्यथित थीं। आए दिन सोशल मीडिया पर इस कम्युनिटी के साथ होने वाले अन्याय की खबरें आती रहतीं थीं। डॉ. शालिनी बताती हैं कि इस कम्युनिटी के साथ ही रेप जैसा अपराध होता है लेकिन इस समाज में एक महिला के साथ अगर रेप हो तो सिर्फ उसे ही रेप माना जाता है। उन्होंने अपने रिसर्च में इसी विषय को प्रमुखता से शामिल किया। उन्होंने रायपुर और जगदलपुर में रहने वाले इस कम्युनिटी के लोगों से बात की। वे बताती हैं कि इस कम्युनिटी के लोगों को ढूंढना आसान नहीं था। अगर वे सामने आते भी थे तो उनसे बात करना आसान नहीं होता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपना शोध पूरा किया।

इस कम्युनिटी के लोग भी नहीं जानते अपने अधिकार

डॉ. शालिनी बताती हैं कि इस कम्युनिटी के लोग भी अपने अधिकार नहीं जानते। सरकार को भी चाहिए कि वह इस कम्युनिटी के लिए काम करे। उनके साथ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए प्रयास होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सराहनीय है लेकिन अभी भी इस कम्युनिटी के लिए कानूनी तौर पर बहुत कुछ होना बाकी है।

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पीएचडी पूरी कर अब लोगों को अवेयर करूंगी

डॉ. शालिनी कहती हैं कि आज भी समाज में लोग इस विषय को लेकर जागरूक नहीं हैं। समाज के लोगों में एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी को लेकर अच्छी सोच नहीं है। वे कहती हैं कि समाज के लोगों को यह बताना जरूरी है कि इस कम्युनिटी के लोग भी आप और हम जैसे हैं। डॉ. शालिनी बताती हैं कि पीएचडी के दौरान ही उनकी शादी हुई और फिलहाल वे लखलऊ में रह रही हैं और अभी अहमदाबाद और बैंगलौर के लॉ कॉलेज के लिए अप्लाई किया है। वे लॉ के स्टूडेंट को पढ़ाते हुए भी इस विषय पर उन्हें अवेयर करना चाहती हैं।