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बस्तर का पसंदीदा डिश है चाउर भाजा, पर्यटकों के बीच इस देसी बिरयानी की है काफी डिमांड

Chaur Bhaja: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के ग्रामीण तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं। कम संसाधनों में भी बेहतर जीवन जीने की कला यहां के ग्रामीणों में देखी जाती है। बस्तर क्षेत्र अपने खान-पान, पहनावा और रहन-सहन के लिए काफी प्रसिद्ध है।

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चाउर भाजा

Chaur Bhaja: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के ग्रामीण तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं। कम संसाधनों में भी बेहतर जीवन जीने की कला यहां के ग्रामीणों में देखी जाती है। बस्तर क्षेत्र अपने खान-पान, पहनावा और रहन-सहन के लिए काफी प्रसिद्ध है। खाने की बात करें तो इसके लिए भी यह अन्य जगहों से बहुत भिन्न है। स्वाद के साथ ही यहां के आहार स्वास्थय के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

बस्तर के आदिवासी ज्यादातर नॉनवेज से अपने व्यंजन तैयार करते हैं। अगर कोई नॉनवेज खाने का शौकीन हैं तो उन्हें बस्तर के आदिवासियों द्वारा तैयार की जाने वाली अलग-अलग डिश यहां खाने को मिलते हैं। नॉनवेज खाने में चापड़ा चटनी के बाद सबसे ज्यादा लोगों की पंसदीदा डिश है तो वह है बस्तर का चाउर भाजा। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं चाउर भाजा के बारे में:

चाउर भाजा को देसी बिरयानी भी कहा जा सकता है, मगर इस डिश को बनाने की विधि बिरयानी से काफी अलग है। ग्रामीण इलाके में हर रोज शाम को ग्रामीण क्षेत्रो में चाउर भाजा के छोटे-छोटे होटल स्थित होते है, जहां स्थानीय लोगों के साथ शहरी क्षेत्र के लोग और विदेशी पर्यटक भी इस चाउर भाजा के स्वाद का आनंद लेते है। चाउर भाजा की डिमांड भी काफी ज्यादा है। बढ़ती मांग को देखते हुए बस्तर में पर्यटकों के लिए ग्रामीण होमस्टे में भी इस नॉनवेज खाने के शौकीनों को परोसा जाने लगा है।

बस्तर जिले के बिलोरी गांव में रहने वाले सुखदेव नाग ने बताया कि इस चाउर भाजा को बनाने के लिए किसी तामझाम की आवश्यकता नहीं होती है। जो जैसा है उसे उसी रूप में पकाकर इस पकवान को तैयार किया जाता है। बस्तर के स्थानीय हल्बी बोली में चाउर का अर्थ होता है चावल और भाजा का मतलब चिकन होता है। इस चाउर भाजा को तैयार करने के लिए चिकन को कम मसालों के साथ पकाकर उसमें चावल मिला दिया जाता है।

चाउर भाजा बनाने की विधि
चाउर भाजा बनाने के लिए सबसे पहले चावल को पहले से ही पानी में भिगोकर रखा जाता है, ताकि वह चिकन के साथ-साथ पक जाए। फिर चाउर भाजा में ग्रामीण अपने हाथ से पीसकर तैयार की जाने वाली देसी मसाले को इसमें डालते हैं। इसके बाद इसे चूल्हे की आग में पकाया जाता है।

सुगंध से ही लोग हो जाते हैं दीवाने
सुखदेव ने आगे बताया कि चाउर भाजा का स्वाद चूल्हे की आग में दोगुना हो जाता है। सुखदेव का कहना है कि हालांकि यह बिरयानी की ही तरह होता है, पर स्वाद में बिरयानी से बिल्कुल अलग होती है। थोड़ा गीला, थोड़ा तीखा, बहुत चटपटा, हल्का फुल्का, स्वादिष्ट चाउर भाजा की महक बहुत अच्छी होती है। इसकी सुगंध मात्र से इसके दीवाने इसकी ओर खिंचे चले आते है। बस्तर घूमने आने वाले पर्यटक इस देसी बिरयानी को बड़े चाव से खाते हैं।

सल्फी के साथ दोगुना हो जाता है स्वाद
बस्तर घूमने आने वाले पर्यटकों को इस डिश के साथ सल्फी ड्रिंक दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि चाउर भाजा और सल्फी का एक सिप इसके स्वाद को और दोगुना कर देता है। ग्रामीण इसे बड़े गंज में पकाते हैं और इस डिश को बेचते हैं। इसे बेचकर ग्रामीणों को अच्छी आय भी होती है। बस्तरवासियों के साथ यह देसी बिरयानी पर्यटकों को भी खूब पसंद आती है। इस वजह से बस्तर में चापड़ा चटनी के बाद चाउर भाजा देसी बिरयानी भी लाखों लोगों की पसंदीदा डिश है।