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विडंबना: बोर्ड कर रहा स्कूलों में अर्धवार्षिक परीक्षाएं लेने की तैयारी, लेकिन हर जिले में कोर्स अधूरा

Course incomplete in the district: इस साल बोर्ड हर जिले में वार्षिक परीक्षा से पहले अर्धवार्षिक परीक्षा अपने पैटर्न पर लेने जा रहा है। इस पैटर्न के तहत 10वीं और 12वीं के छात्रों से उनके कोर्स के 60 से 70 प्रतिशत सवाल पूछे जाएंगे। इसकी तैयारी बोर्ड में जारी है।

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Course incomplete in the district: इस साल बोर्ड हर जिले में वार्षिक परीक्षा से पहले अर्धवार्षिक परीक्षा अपने पैटर्न पर लेने जा रहा है। इस पैटर्न के तहत 10वीं और 12वीं के छात्रों से उनके कोर्स के 60 से 70 प्रतिशत सवाल पूछे जाएंगे। इसकी तैयारी बोर्ड में जारी है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने महीनेभर पहले ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एक आदेश जारी कर कहा था कि वे दिसंबर के पहले सप्ताह से पहले यानी नवंबर अंत तक कोर्स पूरा कर लें लेकिन पत्रिका की छह जिलों की टीम ने जब इस मामले में पड़ताल की तो मालूम हुआ कि अधिकांश स्कूलों में अभी भी कोर्स पिछड़ा हुआ है।

औसतन सभी स्कूलों में दो महीने के विलंब से पढ़ाई आगे बढ़ रही है। दरअसल इसके पीछे की प्रमुख वजह शिक्षकों का तबादले और धरना-प्रदर्शन में उलझे रहना है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। हालांकि अब जब कोर्स पूरा ना होने पर रिजल्ट प्रभावित होने की स्थिति में शिक्षकों पर जवाबदेही तय की गई है। इसके बाद सभी जिलों में शिक्षक कोर्स पूरा करने में जुटे हुए हैं, लेकिन पत्रिका टीम को अपनी पड़ताल में जो जानकारी मिली है उसके अनुसार अधिकांश स्कूल अभी 50 प्रतिशत कोर्स ही पूरा करवा पाए हैं और अर्धवार्षिक परीक्षा में जितना वक्त बचा है तब तक 70 प्रतिशत कोर्स पूरा होना मुश्किल है। अगर ऐसा हो भी जाता है तो बच्चों का रिजल्ट का स्तर जरूर प्रभावित होगा।

इस बीच माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है इसके अनुसार दिसंबर के पहले सप्ताह में हर जिले में 10वीं-12वीं की अर्ध वार्षिक परीक्षा बोर्डं के पैटर्न पर ही होगी। वहीं सभी जिलों के स्कूलों में बोर्ड के बच्चों की प्रायोगिक परीक्षा 10 से 31 जनवरी के बीच पूरी की जाएगी। इसके लिए पहले ही टाइम टेबल बोर्ड ने जारी कर दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट पर टाइम टेबल अपलोड है।

कोण्डागांव : जनवरी तक 100 प्रतिशत कोर्स पूरा करने का रखा गया लक्ष्य
कोण्डागांव जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल का कहना है कि 70 र्प्रतिशत कोर्स पूरा हो चुका है और बाकी के कोर्स को जनवरी तक पूरा कर लिया जाएगा। डीईओ के इस दावे की जब पड़ताल की गई तो पत्रिका ने पाया कि कोण्डागांव जिला मुख्यालय में स्थिति बेहतर है लेकिन अंदरूनी इलाके के स्कूलों में अभी कोर्स 50-55 प्रतिशत के आसपास ही अटका हुआ है। वहीं आत्मानंद स्कूल में परीक्षाएं हो चुकी हैं।

सुकमा : जहां बदहाल शिक्षा व्यवस्था की खबरें वहां 60% कोर्स पूरा करने की बात
सुकमा जिले से हर दिन किसी ना किसी क्षेत्र से बदहाल शिक्षा व्यवस्था की खबरें मीडिया में आ रही हैं। ऐसे जिले में जिला शिक्षा अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वे बोर्ड की गाइड लाइन को पूरा करने के करीब हैं। डीईओ नितिन डडसेना का कहना है कि हम शासन के निर्देश के तहत दिसंबर अंत तक शत प्रतिशत कोर्स पूरा कर लेंगे। उनका कहना है कि जो भी नुकसान हड़ताल व अन्य कारणों से हुआ है उसकी भरपाई की जा रही है।

बीजापुर : विज्ञान और गणित के शिक्षक नहीं, वैकल्पिक व्यवस्था से चल रहा काम
बीजापुर जिले में विषयवार पढ़ाई कहीं 50 तो कहीं 55 फीसदी ही कंप्लीट हो पाई है। विज्ञान और गणित जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी के चलते वैकल्पिक व्यवस्था से सिलेबस पूरा करवा रहे हैं। गंगालूर, धनोरा, नैमेड सहित 29 हाई स्कूल और 33 हायर सेकंडरी स्कूल बीजापुर जिले में संचालित हैं। डीईओ बीआर बघेल ने बताया की आगामी 19 दिसंबर से अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी।

दंतेवाड़ा जिले के हर ब्लॉक में 10वीं-12वीं का कोर्स पूरा करने के लिए विशेष रूप से कलेक्टर विनीत नंदनवार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वे लर्निंग आउटकम पर ज्यादा जोर देते हुए लगातार इसकी मोनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने हर ब्लॉक के बीईओ और डीईओ से कह दिया है कि परिणाम बिगड़ते हैं तो वे और उनके शिक्षक जिम्मेदार होंगे। वे समय-सीमा की बैठक में लगातार कोर्स पूरा करने पर जोर दे रहे हैं। पत्रिका को अपनी पड़ताल में मालूम हुआ कि दंतेेवाड़ा मुख्यालय के आसपास तो स्थिति ठीक है लेकिन अंदरूनी इलाके में अभी भी शिक्षकों को काफी मेहनत करनी होगी।

बस्तर जिले में कलेक्टर चंदन कुमार कोर्स अधूरा रहने और उसे समय पर पूरा करने को लेकर लगातार शिक्षा विभाग के लिए निर्देेश जारी कर रहे हैं। हालांकि उनके निर्देश का बस्तर जिले में शहरी इलाके को छोड़ बाकी के हिस्सों पर कोई खास असर नहीं हो रहा है। बस्तर जिले में जगदलपुर ब्लॉक को छोड़ बाकी के सभी छह ब्लॉकों में अभी भी कोर्स 15 से 20 फीसदी तक पिछड़ा हुआ है। कुछ महीने पहले कलेक्टर ने जिले के सभी स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक ली थी और कहा था कि बच्चों के अच्छे और बुरे हर तरह के परिणाम के लिए आप ही जिम्मेदार होंगे। इसके बावजूद कई प्राचार्यों के नेतृत्व में अभी शिक्षक अभी भी लापरवाही कर रहे हैं।

नारायणपुर जिले ने कोर्स पूरा करने को लेकर बड़ा दावा किया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र देहारी कर रहे हैं कि 70 प्रतिशत कोर्स सभी स्कूलों में पूरा हो चुका है और बचा हुआ 30 फीसदी कोर्स दिसंबर अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। इस हवा-हवाई दावे में कोई दम नहीं है क्योंकि नारायणपुर जैसे जिले से यह दावा तब किया जा रहा जब वहां के अधिकांश स्कूल एकल शिक्षकीय हैं। स्कूलों में शिक्षक हैं भी तो वे समय पर क्लास लेने नहीं पहुंचते। अंदरूनी इलाकों के स्कूलों का तो और भी ज्यादा बुरा हाल है। नारायणपुर जिले के अंदरूनी इलाकों के स्कूलों की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आज भी इन स्कूलों में शिक्षकों की सुलभता की समस्या बनी हुई है।