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बस्तर के पूर्व महाराजा पर बनी डॉक्यूमेंट्री को फिल्मफेयर में एंट्री, प्रवीर चंद्र भंजदेव पर बनी है फिल्म

I Pravir the Adivasi God: इस फिल्म को केरल के एसआईजीएनएस फिल्म फेस्टिवल, कोलकाता में साउथ एशियन शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल, केरल में ही इंटरनेशल डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल और बंगाल इंटरनेशल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में स्थान मिल चुका है। इसके अलावा ब्राजील में फ्राइसिने फेस्टिवल में भी इसे जगह मिल चुकी है।

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बस्तर के पूर्व महाराजा पर बनी डॉक्यूमेंट्री को फिल्मफेयर में एंट्री, प्रवीर चंद्र भंजदेव पर बनी है फिल्म

I Pravir the Adivasi God: बस्तर (Bastar) के पूर्व महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव (Pravir Chandra Bhanj Deo) पर बनी शॉर्ट फिल्म ‘आई प्रवीर द आदिवासी गॉड’ (I Pravir the Adivasi God) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इसका नामांकन फिल्मफेयर (Filmfare 2022) के लिए हो गया है। अब अवार्ड के लिए वोटिंग की प्रक्रिया चल रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि बस्तर पर बनी कोई फिल्म इतने बड़े पुरस्कार के मंच तक पहुंची है।

इस डॉक्टयूमेंट्री की पूरी शूटिंग बस्तर में हुई है। फिल्म के डायरेक्टर विवेक कुमार हैं। वे मूलत: अयोध्या के रहने वाले हैं लेकिन अभी मुंबई में रहते हैं। विवेक ने बताया कि फिल्म 20 मिनट की है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म होने की वजह से इसमें स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा और उनको जगह दी है। इस फिल्म को तीन राष्ट्रीय तो एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में जगह मिल चुकी है।

फिल्म: आई प्रवीर द आदिवासी गॉड
निर्माता: विवेक कुमार
छायांकन: अंजार नबी, प्रशांत शिंदे, राजेश वडक्के कांडी
संपादन, ध्वनि और डीआई : आशीष शाह
प्रचार डिजाइन: मयूर प्रकाश कुलकर्णी
ट्रेलर: सचिन कुमार श्रीवास्तव, आशीष शाह

आज वोटिंग का आखिरी दिन
फिल्मफेयर की शॉर्ट फिल्म कैटगिरी में सिलेक्ट किया गया है। अब इसके लिए वोटिंग की जा रही है। जिसे जितने ज्यादा वोट मिलेंगे उसकी जीत होगी। विवेक बताते हैं कि इसके फिल्मफेयर की साइट में शॉर्ट फिल्म के कॉलम पर जाकर वोटिंग की जा सकती है। इसके अलावा क्रिटिक्स वर्ग में भी इसका सलेक्शन बाकी है। जिसमें कोई वोटिंग नहीं होगी। कंटेंट के आधार पर ही अवार्ड दिया जाएगा।

बस्तर महाराजा से आज भी जुड़े हैं लोग
डायरेक्टर विवेक कुमार ने बताया कि बस्तर महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव से आज भी लोग अपने आप को सीधे जोड़ते हैं। वे मानते हैं कि आज भी लोकतंत्र से जुड़कर उनके आदिवासी नेता उनका दिल नहीं जीत पाए हैं। लोकतंत्र में उनका काम हो नहीं रहा या हो भी रहा है तो उसकी गति बेहद धीमी है। वे बस्तर महाराजा को याद करते हुए कहते नजर आते हैं कि वे होते तो उनकी सुनवाई होती। विवेक ने बताया कि यहां पर वे अपनी फिल्म पूरी कर पाए इसके पीछे का अहम कारण अंजार नबी है। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि बस्तर जैसे क्षेत्र में इतना होनहार कैमरामैन है।