CG News: बस्तर में सरकार की ओर से की जाने वाली जनगणना सही नहीं होती है। केवल कागजों में ही बिना सर्वे जनगणना कर ली जाती है।
CG News: बस्तर के जिन आदिवासियों को तकनीक और समाज की मुख्यधारा से दूर बताया जाता है, अब उन्हीं आदिवासियों ने सरकार से पहले समाज के बीच जनजातीय जनगणना शुरू कर दी है। इस काम को सर्व आदिवासी समाज की अगुवाई में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए 200 से अधिक समाज के युवाओं की टीम बनाई है, जिन्हें मोबाइल एप के जरिए दो माह जनगणना व डाटा कलेक्शन का प्रशिक्षण दिया गया।
बस्तर संभाग के सात जिलों के 1200 गांवों में जनगणना का काम किया जा रहा है। वहीं जनगणना में डाटा कलेक्शन के लिए 12 बिंदु तय किए गए हैं। जनगणना के दौरान परिवार के सदस्यों की संख्या के अलावा आय, जाति, धर्म, भूमि, शिक्षा, व्यवसाय, पलायन जैसे विषयों जानकारी ली जा रही है। इसके अलावा समाज के धर्मांतरित लोगों की जानकारी भी इकट्ठा की जा रही है।
सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि जनगणना और डाटा संग्रहण का मुख्य उद्देश्य उन सामाजिक समस्याओं की जानकारी इकट्ठा करना है, जिनका डाटा नहीं होने से समाधान नहीं हो पाता है।
आदिवासी समाज की जनगणना में समाज के लोगों का विस्तृत ब्योरा लिया जा रहा है तो आदिवासी समाज के बीच गांवों में रहने वाले एससी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के लोागें की गणना भी की जा रही है। समाज का कहना है कि बस्तर संभाग में यह जनगणना सफल रही तो सरगुजा संभाग में भी यह अभियान चलाया जाएगा।
CG News: अरविंद नेताम, पूर्व केंद्रीय मंत्री: बस्तर में सरकार की ओर से की जाने वाली जनगणना सही नहीं होती है। केवल कागजों में ही बिना सर्वे जनगणना कर ली जाती है। ऐसे में आदिवासी जनजाति और उसकी आबादी की सही गणना नहीं हो पाती। इस बार भी जनगणना में कोई त्रुटि न हो, इसलिए समाज के लोग पहले ही अपना डाटा तैयार रखना चाहते हैं। इस पहल से आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा करने और पहचान को बनाए रखने में मददगार होंगे।