
जानिए मेडिकल कॉलेज कैसे मरीजों की जान से कर रहा खिलवाड़, अगर यही हाल रहा तो...
जगदलपुर. मेडिकल कॉलेज के सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) मशीन में सालभर से गड़बड़ी है। ऐसे में लैब टेक्नीशियन ब्लड जांच करने के बाद मरीजों को जो रिपोर्ट थमा रहे हैं डॉक्टर उसी रिपोर्ट के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इससे मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए आने वाले मरीजों की हालत सुधरने के बजाए और बिगड़ रही है। इस प्रकार मेकाज प्रबंधन मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहा है।
मेडिकल कॉलेज के सेंट्रल लैब से मरीजों को सही ब्लड जांच रिपोर्ट नहीं मिल रहा है। अब तक ऐसे तीन से चार मामले सामने आ चुके जिसमें मरीजों की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी मिली है। इस मामले को लेकर पत्रिका की टीम ने पड़ताल की तो इसका खुलासा हुआ। पत्रिका के रिपोर्टर ने जब मेकाज में ब्लड जांच करवाया, तो एचबी (हीमोग्लोबिन) 11.2 आया। वहीं जब निजी लैब में जांच करवाने पर एचबी 15.2 आया। इतना ही नहीं सीबीसी के अन्य रिपोर्ट में भी काफी अंतर आया है। इस प्रकार की लापरवाही मेडिकल कॉलेज के लिए आम बात हो गई है। बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर कोई पहल नहीं कर रहे हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
सीजीएमएससी से की गई है सीबीसी मशीन की खरीदी
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने सालभर पहले सीजीएमएससी से चार सीबीसी मशीन की खरीदी किया था। मशीन के उपयोग के बाद लैब टेक्नीशियनों ने गड़बड़ी की जानकारी प्रबंधन को दिए। मेकाज के सभी सीबीसी मशीन में गड़बड़ी है। बावजूद अब तक मशीन का सुधार नहीं हुआ है।
इसे गड़बड़ी कहे या लापरवाही
१०.८ ग्राम था खून, जांच में आया १.१ ग्राम
बस्तर ब्लॉक के ग्राम गाडिय़ापाल निवासी लखमू की १४ वर्षीय बेटी मनीता की तबियत बिगडऩे पर ९ जून को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया। यहां ब्लड जांच करने पर एचबी १.१ ग्राम आया। इससे परिजनों के होश उड़ गए। इसके बाद जब परिजनों ने हंगामा किया तो दोबारा जांच करवाई गई। दोबारा हुई जांच में १०.८ ग्राम एचबी पाया गया। तब परिजनों ने राहत की सांस ली। उन्होंने भी व्यवस्था पर नाराजगी जताई है।
निजी लैब में जांच तो रिपोर्ट में आया फर्क
सप्ताहभर पहले दरभा ब्लॉक के कमलुपारा निवासी जगमोहन के १७ वर्षीय बेटे की तबियत अचानक बिगडऩे पर डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया। चेकअप के बाद डॉक्टर ने ब्लड जांच के लिए कहा। जांच के बाद बच्चे का एचबी ५-६ ग्राम आया। इसके बाद परिजनों ने जब निजी लैब में ब्लड जांच करवाया जो एचबी लगभग १० से ११ ग्राम के बीच आया। इसके अलावा अन्य जांच रिपोर्ट में भी काफी अंतर मिला।
सालभर में ही खराब हो गई लिफ्ट
करोड़ों की लागत से बने मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग शिफ्टिंग के साल-डेढ़ साल में ही जर्जर हो रही हैं। चार मंजिला हॉस्पिटल में मरीज और उनके परिजनों के लिए तीन लिफ्ट लगाए गए हैं, जिसमें से दो लिफ्ट खराब हैं। इतना ही नहीं हॉस्पिटल के आधे से अधिक शौचालय जर्जर हो गए हैं। कहीं फ्लैस नहीं है, तो कहीं टॉयलेट और यूरिनल सीट ही गायब हैं। इससे परिजनों को काफी परेशानी होती हैं। लगातार मरीजों व परिजनों की शिकायत के बाद भी शौचालय की मरम्मत को लेकर अस्पताल प्रबंधन कोई पहल नहीं कर रहा है जिससे मरीज व उनके परिजन हलाकान है।
सीजीएमएससी को लगातार कर रहे शिकायत
सीजीएमएससी से करीब सालभर पहले चार सीबीसी मशीन की खरीदी की गई थी। शुरू से ही इन मशीनों में गड़बड़ी है, जिससे ब्लड जांच रिपोर्ट में भी गड़बड़ी हो रही है। मशीन की मरम्मत के लिए लगातार सीजीएमएससी को लिखित में शिकायत कर रहे है। बावजूद अब तक मरम्मत के लिए कोई इंजीनियर नहीं पहुंचा है। वहीं गंभीर मरीजों की जांच स्लाइड के माध्यम से की जा रही है, ताकि जांच रिपोर्ट सही मिल सके।
डॉ. केएल आजाद, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज
Published on:
13 Aug 2019 11:29 am

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