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400 करोड़ का ये मेडिकल कॉलेेज भरा पड़ा है अव्यवस्थाओं से, और जिम्मेदार बनाते हैं ये बहाना

चार सौ करोड़ के मेडिकल कॉलेज की सालभर में ही खुली पोल, शौचालय चोक, गिरने लगी सीलिंग, गर्म पानी का मशीन खराब, तो इमरजेंसी आईसीसीयू का गिर रहा सीलिंग, मरीजों को और भी कई दिक्कतें

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400 करोड़ का ये मेडिकल कॉलेेज भरा पड़ा है अव्यवस्थाओं से, और जिम्मेदार ये बनाते हैं बहाना

जगदलपुर . बस्तरवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ४०० करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज बनाया गया है। शिफ्टिंग के सालभर बाद ही गुणवत्ताहीन निर्माण की पोल खुल गई है। हॉस्पिटल के वार्डों का शौचालय चोक हो गया है, तो कहीं सीलिंग गिर रही है। वहीं डॉक्टर चेंबर, ऑपरेशन थिएटर और वार्डों में सीपेज से लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

लापरवाही भुगतनी पड़ती है मरीजों व परिजनों को
हॉस्पिटल के इमरजेंसी मेडिकल आईसीयू और आईसीयू के सामने का सीलिंग गिर रहा है। मरीजों के लिए छत पर लगे गर्मपानी का मशीन भी कई महीनों बंद पड़ा हुआ है। इतना ही नहीं पुरूष आर्थोवार्ड, महिला आर्थोवार्ड, गायनिक वार्ड, महिला मेडिकल वार्ड, पुरूष मेडिकल वार्ड में वाश बेसिन नहीं है, शौचालय चोक है, बाथरूम बंद है, तो ज्यादातर नल और फ्लैश सिस्टम खराब हो गया है। मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण की मॉनिटरिंग पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों ने जमकर मनमानी की है। अब मरम्मत के लिए कॉलेज प्रबंधन पीडब्ल्यूडी विभाग को कई बार पत्र लिख चुका है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही का डॉक्टर, स्टाफ, मरीज व उनके परिजनों को भुगतनी पड़ रही हैं।

अब तक शुरू नहीं हुई सीटी स्कैन मशीन
डिमरापाल में मेडिकल कॉलेज को शिफ्ट हुए सालभर हो गया, लेकिन अब तक यहां पर सीटी स्कैन मशीन स्टॉल नहीं किया गया है। शिफ्टिंग के पहले ही करोड़ों रुपए की लागत से मशीन की खरीदी कर ली गई थी। हॉस्पिटल प्रबंधन की लापरवाही की वजह से मरीजों को जांच के लिए निजी सेंटर जाना पड़ रहा है। इधर ये पैथालाजी सेंटर अशिक्षित तकनीशियन से काम करवाते हंै।

पांच साल से ब्लड बैंक की मान्यता नहीं
जिले में मेडिकल कॉलेज पांच सालों से संचालित हो रहा है, लेकिन अब तक ब्लड बैंक की मान्यता नहीं मिली है। ब्लड बैंक के लिए लाखों रुपए खर्च कर मशीनों की खरीदी भी हो चुकी है। सिजेरियन डिलवरी, आर्थो व अन्य ऑपरेशन के पहले परिजनों को ब्लड के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यहां ब्लड सेपरेटर यूनिट भी चार साल से रखी गई थी। तकनीकी वजह से यह बंद पड़ी है।

इन विभागों में भी नहीं विशेषज्ञ डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और नेफ्ररोलॉजिस्ट ही नहीं हैं। ह्दय रोग और किडनी रोग से संबंधित मरीजों को भी इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। हॉस्पिटल में एक रेडियोलॉजिस्ट पदस्थ था, जो महीनेभर पहले ही काम छोडक़र चले गए। डॉक्टरों के अलावा हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी के लिए भी कर्मचारी पदस्थ नहीं है।

मरम्मत के लिए कोई पहल नहीं
मेडिकल कॉलेज के प्रभारी अधीक्षक डॉ. नवीन दुल्हानी ने बताया कि, हॉस्पिटल में ज्यादातर वार्डों के शौचालय जाम हैं, वाश बेसिन नहीं है, बाथरूम बंद है, तो नल और फ्लैश सिस्टम भी खराब हो गया है। इसके अलावा वार्ड और डॉक्टर चेंबर के सीलिंग से सीपेज भी हो रहा है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी को कई बार पत्र लिख चुके है, लेकिन मरम्मत के लिए कोई पहल नहीं किया जा रहा है।

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