
दियारी तिहार बस्तर
Diyari Tihar Bastar: धान कटाई के बाद बस्तर (Bastar)के ग्रामीण अंचलों में दियारी तिहार (Diyari Tihar)की रौनक देखी जा रही है। धान की फसल घर तक पहुंचने के बाद परपंरा अनुसार अलग-अलग गांवों में तिहार मनाया जा रहा है। ग्रामीण कुल देवी और गा्रम देवी की पूजा-अर्चना कर गांव की खुशहाली की कामना करते हैं। वहीं कोठार में बांस के सूपे में धान रखकर पूजा की जा रही है। मवेशियों को नहला-धुला कर खिचड़ी खिलाई जाती है व उनकी पूजा की परंपरा एक माह तक चलेगी।
बादल अकादमी में पदस्थ शोधकर्ता दीप्ति ओगरे ने बताया कि बस्तर में महालक्ष्मी पूजा को स्थानीय आदिवासी राजा दियारी(Diyari Tihar) कहते हैं। बस्तर (Bastar) के ग्रामीण अंचल में आदिवासियों के अलावा माहरा, रावत, कलार, लोहार, कोष्टा, केवट आदि जाति के लोग धान कटाई के बाद दियारी (Diyari Tihar)मनाते हैं।
पर्व के बारे में जैतगीरी निवासी प्रवीण भोयर ने बताया कि गांव के सिरहा, पुजारी व पटेल के सहमित पर सप्ताह के किस दिन पर्व मनाना है तय होता है। दियारी(Diyari Tihar) के दिन ग्रामीण (Bastar)आसपास के गांव के अपने रिश्तेदारों व परिचितों को न्योता देते हैं। क्षमतानुसार भोज कराया जाता है। तीन दिन मनाए जाने वाले तिहार में पहले दिन ग्रामीण गांव की प्रमुख गुड़ी ( पूजा स्थल) में एकत्र होते हैं। वहां माता शीतला की पूजा-अर्चना कर गांव में खुशहाली की कामना कर दूसरे दिन सुबह महिलाएं आंगन को गोबर से लीपती है और प्रवेश द्वार से गाय कोठे तक लाल मिट्टी से दिशा निर्देश स्वरूप लीपकर चावल आटे के घोल से गाय बैल के पैरों के निशान बनाते हैं।
नए मिट्टी के बर्तन में पांच प्रकार के पकवान तैयार
इस तीसरे दिन को अपने सहूलियत के अनुसार तय किया जाता है, इस दिन को बासी तिहार(Diyari Tihar) के रूप में मनाया जाता है। दियारी के दिन किसी कारण से भोज में सम्मिलित न हो पाए लोगों को एक बार और भोजन कराया जाता है। दियारी (Diyari Tihar)के दिन जो भी पकवान बने होते हैं फिर से बनाए जाते हैं और आने वाले लोगों को खिलाया जाता है। इसे ही बासी तिहार कहा जाता है। दियारी परब पूर्ण रूप से पशुधन पर अधारी त्यौहार है जिसे बस्तर के आदिवासियों की दीपावली कहा जा सकता है।
पुरुष धान की बालियों से सेला बनाते हैं पशुओं को नहलाते धुलाते हैं। और घर की महिलाएं नए मिट्टी के बर्तन में पांच प्रकार के कंद और नए चावल से खिचड़ी तैयार करती हैं और पुरुष पूजा अर्चना कर के गाय बैलों को खिचड़ी खिलाते हैं। इस दिन (Diyari Tihar)गायों के गले में मोर पंख, पलाश की जड़ और ऊन से तैयार गेठा (सोहई) पहनाया।
Published on:
07 Jan 2023 01:44 pm
बड़ी खबरें
View Allजगदलपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
