23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्राचार्य को मनमानी पड़ी भारी, आरटीआई का जवाब नहीं दिया तो सूचना आयोग ने लगाया सवा लाख का जुर्माना

Information commission imposed a Fine: प्राचार्य आयोग की बात भी नहीं मान रही थीं। कई बार जवाब देने के लिए आयोग ने कहा लेकिन उन्होंने नहीं दिया। लंबे वक्त के बाद आयोग ने किसी पर ऐसी कार्रवाई की है। कहा जा रहा है कि प्राचार्य पर आगे और भी कई आवेदनों पर जुर्माना लग सकता है।

2 min read
Google source verification
पीजी कॉलेज

पीजी कॉलेज

Information commission imposed a Fine: पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. विजय लक्ष्मी को मनमानी भारी पड़ गई है। उन्होंने कॉलेज से आरटीआई के तहत मांगी गई एक जानकारी आवेदक को नहीं दी और अब राज्य सूचना आयोग ने उन पर पांच मामलों में 25-25 हजार का जुर्माना लगाया है।

पांच आवेदनों पर जानकारी नहीं देने पर डॉ. विजय लक्ष्मी को अब सवा लाख रुपए का भुगतान जुर्माने के रूप में करना होगा। इसके अलावा कॉलेज और प्राचार्य पर अभी भी 100 से ज्यादा सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लंबित हैं, जिनके जवाब उन्होंने नहीं दिए हैं। बताया जा रहा है कि अगर वे आगे भी इसी तरह का रवैया बनाए रखती हैं और आवेदक के द्वारा चाही गई जानकारी नहीं देती हैं तो राज्य सूचना आयोग आयोग उन पर इसी तरह से कार्रवाई जारी रख सकता है। दरअसल कॉलेज के एक पूर्व कर्मचारी को प्राचार्य ने बर्खास्त कर दिया था।

इसके बाद से ही वह कर्मचारी लगतार अपनी बर्खास्तगी का कारण और जरूरी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए आवेदन कर रहा है। इसके बावजूद उसे जानकारी नहीं दी गई। बीते कुछ सालों वह कर्मचारी प्राचार्य और कॉलेज प्रबंधन से सीधे 100 से ज्यादा आवेदन कर जानकारी मांग चुका है लेकिन उसे जानकारी नहीं दी गई है। कर्मचारी ने अब राज्य सूचना आयोग का रुख किया है और उसके हक में निर्णय होना शुरू हो चुका है। उस कर्मचारी का कहना है कि प्राचार्य पूरे मामले में गलत हैं इसलिए जवाब देने से बच रही हैं। अगर सब कुछ सही होता तो वह ऐसा नहीं करतीं। अब जब राज्य सूचना आयोग ने प्राचार्य पर कार्रवाई की है तो कर्मचारी की बर्खास्तगी व कॉलेज से जुड़े अन्य भ्रष्टाचार के मामले को लेकर हडक़ंप मचा हुआ है।

एनएसयूआई फिर हो सकती है उग्र
प्राचार्य के खिलाफ कांग्रेस के ही छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी मोर्चा खोल रखा है। एनएसयूआई के कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने वरिष्ठ नेताओं की बात का मान रखते हुए पिछले दिनों हुए अनशन को स्थगित कर दिया था लेकिन आगे भी अगर प्राचार्य पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। एनएसयूआई ने पिछले दिनों प्राचार्य हटाओ कॉलेज बचाओ का नारा बुलंद करते हुए आंदोलन किया था।

यह भी पढ़ें: पेश की मिसाल: आश्रम छात्रावास में नहीं था बच्चों के लिए सभागार, पालकों ने श्रमदान कर बना डाला शेड

भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर घिरीं प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. विजय लक्ष्मी भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर घिरी हुई हैं। उनके खिलाफ लगातार मामले सामने आ रहे हैं। विधानसभा में कंप्यूटर के उपयोग की गलत जानकारी देने से लेकर सीसीटीवी खरीदी व अन्य घोटालों को लेकर वे निशाने पर हैं। उनके खिलाफ जांच की मांग लगातार हो रही है लेकिन अब तक वे पद पर बनी हुई हैं। जिस कर्मचारी को आयोग ने सवा लाख रुपए देने का आदेश दिया है उसने ही कॉलेज प्रबंधन और प्राचार्य के खिलाफ जो 100 से ज्यादा आरटीआई लगाई है उसमें कई भ्रष्टाचार से जुड़े हुए हैं।

कॉलेज के जनभागीदारी मद से कॉलेज में अब तक करोड़ों के काम करवाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। हर साल औसतन 60 से 90 लाख रुपए तक का बजट तय किया जा रहा है लेकिन कॉलेज में उस स्तर का काम दिख नहीं रहा है। कॉलेज के छात्र अब भी मुलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और उन्हें वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कॉलेज की हालत लगातार खराब हो रही है।