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Tendu Patta Strike: छत्तीसगढ़ में प्रबंधकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 65 लाख संग्राहकों की आजीविका पर संकट

Tendu Patta Strike: छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से 14 लाख परिवार और 65 लाख संग्राहकों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

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प्रबंधकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू (photo source- Patrika)

प्रबंधकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू (photo source- Patrika)

Tendu Patta Strike: छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के 902 प्रबंधकों ने 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। यह आंदोलन सिर्फ कर्मचारियों की मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर जंगलों पर निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है।

Tendu Patta Strike: 38 साल की सेवा, फिर भी नहीं मिला हक

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू का कहना है कि प्रबंधक पिछले 38 वर्षों से वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज संग्रहण, समितियों का संचालन और शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला। न तो स्थायी नौकरी की सुरक्षा है और न ही वेतन, पेंशन या अन्य मूलभूत सुविधाएं।

उनके मुताबिक, बार-बार ज्ञापन सौंपने और आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे प्रबंधकों में गहरा असंतोष है। अब उन्होंने इसे “सम्मान और अधिकार की लड़ाई” बताते हुए निर्णायक आंदोलन का रास्ता चुना है।

65 लाख संग्राहकों पर असर

इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर प्रदेश के लगभग 14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों और करीब 65 लाख से अधिक संग्राहकों पर पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण केवल एक काम नहीं, बल्कि लाखों ग्रामीणों की सालाना आय का प्रमुख स्रोत है। तेंदूपत्ता सीजन के दौरान ही ग्रामीणों को नकद आय मिलती है, जिससे वे सालभर की जरूरतें पूरी करते हैं। ऐसे में खरीदी प्रक्रिया रुकने या बाधित होने से सीधे उनके घरों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।

67 प्रकार के वनोपज पर भी असर

तेंदूपत्ता के अलावा राज्य में 67 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी की जाती है। इनमें महुआ, चिरौंजी, हर्रा, बहेरा, साल बीज जैसे उत्पाद शामिल हैं। हड़ताल के कारण इन सभी की खरीदी, बोनस वितरण, बीमा और अन्य योजनाएं प्रभावित होंगी। इसका मतलब यह है कि केवल तेंदूपत्ता ही नहीं, बल्कि पूरे वन आधारित अर्थतंत्र पर इसका असर देखने को मिलेगा। ग्रामीणों की नकदी आय घटेगी, बाजार में आपूर्ति प्रभावित होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था धीमी पड़ सकती है।

प्रमुख मांगें क्या हैं?

प्रबंधक संघ ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है, जिनमें शामिल हैं—

  • नियमित कर्मचारी का दर्जा
  • वेतन मैट्रिक्स लेवल 07, 08 और 09 लागू करना
  • सेवा सुरक्षा की गारंटी
  • पेंशन सुविधा
  • अनुकंपा नियुक्ति
  • लंबित भुगतान का निराकरण

संघ का कहना है कि ये सभी मांगें बुनियादी अधिकारों से जुड़ी हैं, जिन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।

Tendu Patta Strike: दंतेवाड़ा में स्थिति और गंभीर

दंतेवाड़ा जिले में इस हड़ताल का असर और ज्यादा गंभीर हो सकता है। यहां 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी शुरू हो चुकी है और 23 अप्रैल से प्रबंधकों के हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है। इस जिले में लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हैं। ऐसे में हड़ताल के चलते खरीदी रुकने या धीमी पड़ने से इन परिवारों की आय पर सीधा असर पड़ेगा। ग्रामीण इलाकों में पहले से सीमित रोजगार विकल्प होने के कारण यह स्थिति और चिंताजनक बन जाती है।

सरकार के लिए चुनौती

यह हड़ताल सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। एक तरफ प्रबंधकों की वर्षों पुरानी मांगें हैं, तो दूसरी तरफ लाखों संग्राहकों की आजीविका का सवाल। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो— वनोपज खरीदी ठप हो सकती है। ग्रामीणों में असंतोष बढ़ सकता है।आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। संघ ने साफ कर दिया है कि अगर मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।