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इस गुफा में प्रकृति सालभर शिवलिंग का करती है जलाभिषेक, आज तक कोई नहीं जान पाया कहा से आता है ये जल

ऊंचे पहाड़ पर है ये गुफा जहां पत्थरों के बीच से पानी रिसकर सालभर होता रहता है शिवलिंग का अभिषेक

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इस गुफा में प्रकृति सालभर शिवलिंग का करती है जलाभिषेक, आज तक कोई नहीं जान पाया कहा से आता है ये जल

इस गुफा में प्रकृति सालभर शिवलिंग का करती है जलाभिषेक, आज तक कोई नहीं जान पाया कहा से आता है ये जल

जगदलपुर. बस्तर अपने अनसुलझे रहस्यों के लिए पूरे राज्य ही नहीं पूरे देश में विख्यात है। जैसे बस्तर का दशहरा विश्व का सबसे लंबा चलने वाला त्यौहार वो यहीं मनाया जाता है। उसी तरह बस्तर में छिपे कई ऐसे रहस्य है जिसके बारे में भी आप शायद कम हीं जानतें हो।

जानिए ऐसे ही एक गुफा में विराजित शिवलिंग का रहस्य
बस्तर. पूरा बस्तर संभाग रहस्यों से भरा है ऐसा ही बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले के बारसूर ब्लॉक के जंगल इलाके में एक रहस्यमयी गुफा है जिसके अंदर कई सालों से एक शिवलिंग विराजित है जिसपर साल के ३६५ दिन प्राकृतिक रूप से केवल शिवलिंग पर ही पानी रिसता रहता है जिसे हम यह कह सकते हैं कि सालभर प्रकृति शिव का जलाभिषेक करती रहती है। लेकिन ये जलाभिषेक के लिए पानी कहां से आता है इसकी जानकारी अभी तक किसी को नहीं है। जल का रिसाव अलग अलग मौसम में अलग अलग होता रहता है।

डगर है कठिन
इस मंदिर तक जाने के लिए आपको जिला दंतेवाड़ा के बारसूर ब्लॉक के अंदर जाना होता है। जहां से एक पगडंडी नुमा रास्ता जाता है। वहां से आप पैदल ये दोपहिया वाहन से जा सकते हैं। इस रास्ते पर करीब २ से ३ नाले पड़ते हैं। जिसपर अगर पानी ज्यादा हो तो वाहन पार कराने में खासी दिक्कत होती है। कई उंचे रास्ते भी हैं जहां वाहन का चढ़ पाना कठिन होता है। अपने गंतव्य तक पहूंचने पर काफी थकान हो जाती है। लेकिन जैसे ही भोले के दर्शन होते हैं। आपकी पूरी थकान मिट जाती है।

एक ये भी है जनश्रुति
एक जनश्रुति के अनुसार कहा जाता है कि, इस गुफा में बाणसुर नामक राक्षस ने खुद को महान बनाने के लिए कई वर्षों तक तपस्या की थी। इसी तपस्या के लिए बाणसुर ने इस गुफा की रचना की थी और यहां सालों तक तपस्या की थी।

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