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नक्सली बेरियर लगाकर वसूल रहे टोल

अबूझमाड़ की तर्ज पर नक्सलियो ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व को भी अपना सुरक्षित बसेरा बना लिया है संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण यह इलाका विकास से कोसों दूर हैं यहाँ कि विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नक्सलियो ने यहाँ अपनी समानंतर व्यवस्था कायम कर रखी हैं

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-नेशनल पार्क बना नक्सलियो का सुरक्षित बसेरा

-बस्तर के इंद्रावती नेशनल पार्क का हाल


जगदलपुर. अबूझमाड़ की तर्ज पर बीजापुर स्थित इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान भी नक्सलियो की सुरक्षित पनाहगार बन गई हैं संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण यह इलाका विकास से कोसों दूर हैं पक्की सड़क और मूलभूत सुविधाएं न होने की वज़ह से यहाँ के अंदरूनी इलाकों तक फ़ोर्स की पहुँच नहीं हैं यही कारण हैं कि नक्सलियो ने यहाँ अपनी समानांतर व्यवस्था क़ायम कर रखी हैं आलम यह हैं कि पार्क के अंदर प्रवेश के लिए नक्सलियो ने बेरियर ( नाका) लगा रखा हैं इसमें अपना नाम पता और शुल्क अदा करके ही लोग आ-जा सकते हैँ

पार्क मेँ नक्सलियों की 5 एरिया कमेटी हो रही संचालित

वैसे तो इंद्रावती नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 2800 वर्ग किमी हैं जिसमे पामेड़ और भैरमगढ़ सेंचुरी भी शामिल हैं इसमें मेँ लगभग 1200 वर्ग किमी का क्षेत्र नक्सलियो का कोर इलाका माना जाता हैं जहाँ से इंद्रावती, भैरमगढ़, मद्देड, भोपालपटनम और कुटरू सहित कुल पांच एरिया कमेटी का संचालन नक्सली करते हैं पार्क अंदर लगभग दो दर्जन गांव भी हैं यहाँ के लोगों को भी नक्सलियो की बाते माननी पडती हैँ

तीन दिशाओं मेँ लगाए तीन बेरियर

पार्क के अंदर प्रवेश के तीन प्रमुख रास्तो मेँ नक्सलियो ने बेरियर लगाए हुए हैं सेंड्रा,पिल्लूर और बेदरे से प्रवेश मार्ग पर स्थापित बेरियर मेँ बकायदा लोगों की तैनाती की जाती हैं जो कि दिन भर वहां बैठे रहते हैं और आने जाने वालों पर पूरी नज़र रखते हैं बाइक का शुल्क 50₹ तो साइकिल का 10₹ निर्धारित किया गया हैं.गरीबो के लिए कोई शुल्क नहीं हैं नक्सलियो ने पार्क के अंदर कई स्थानों मेँ बोर्ड भी लगाए हैं जिसमे पेड़ो की कटाई और वन्य प्राणियों के शिकार न करने की बात कही हैं अवहेलना करने पर पचास हज़ार का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी हैं.

बड़े नक्सलियो की शरणस्थली हैं पार्क

विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नेशनल पार्क के अंदरूनी इलाकों मेँ फ़ोर्स नहीं पहुँच पाती हैं सूत्रों के मुताबिक नक्सलियो ने पार्क मे तीन ऐसे ठिकाने बना लिए हैं जहाँ उनके शीर्ष नेता आकर लम्बे समय तक रुकते हैं बैठके करते हैं फिर यहाँ से दूसरे इलाके के लिए रवाना हो जाते हैं
पार्क के अंतिम छोर मेँ इंद्रावती नदी बहती हैं नदी के उस पार अबूझमाड़ और महाराष्ट्र हैं बड़े नक्सली नेता नौका के माध्यम से नदी पार कर आसानी से अबूझमाड़ और महाराष्ट्र पहुँच जाते हैं

वर्सन
बस्तर के अंदरूनी इलाकों मेँ सुरक्षा बलों के कैंप खुलने के बाद नक्सली बैकफुट पर आए हैं बहुत ही जल्दी नेशनल पार्क का इलाका भी नक्सलियो से खाली करवा लिया जाएगा.
सुंदरराज पी
आईजी बस्तर

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