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विकास नहीं विनाश के लिए लाई जा रही रेल , आंदोलनकारी बोले नक्सली विकास विरोधी

CG Jagdalpur News : नक्सलियों ने रेल लाइन का विरोध करते हुए कहा कि बस्तर के विकास के लिए नहीं, विनाश के लिए है। रेल संघर्ष समिति का रेल मांग आंदोलन पूंजीपतियों द्वारा प्रायोजित है।

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विकास नहीं विनाश के लिए लाई जा रही रेल , आंदोलनकारी बोले नक्सली विकास विरोधी

विकास नहीं विनाश के लिए लाई जा रही रेल , आंदोलनकारी बोले नक्सली विकास विरोधी

CG Jagdalpur News : जगदलपुर के दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेललाइन के लिए चल रहे आंदोलन को लेकर अब नक्सलियों ने भी अपना रूख सामने रख दिया है। उन्होंने इस रेल लाइन का विरोध करते हुए कहा कि बस्तर के विकास के लिए नहीं, विनाश के लिए है। रेल संघर्ष समिति का रेल मांग आंदोलन पूंजीपतियों द्वारा प्रायोजित है। इस रेललाइन का विरोध करने और पर्यावरण को बचाने की अपील नक्सलियों ने की है।

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राज्य सरकार ने बड़े कॉरपोरेट कंपनियों से किए समझौते

नक्सलियों की उत्तर सब जोनल ब्यूरो की प्रवक्ता मंगली ने पर्चा जारी कर कहा है कि बस्तर संभाग के विकास यानी यहां के आदिवासियों के विकास के नाम से दल्ली-रावघाट-जगदलपुर रेललाइन परियोजना को शुरू किया गया। दरअसल केंद्र, राज्य सरकारों ने बड़े कॉरपोरेट कंपनियों से किए समझौते के मुताबिक ही यह परियोजना का रूप रेखा तैयार किया है। इसमें बस्तर के जंगल पहाड़ों में मौजूद बहुमूल्य खनिज संपत्ति व संसाधनों को दोहन करके आसान व सस्ते में रेल मार्ग से बाहर ले जाना इसका असली मकसद है।

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नक्सलियों ने कहा कि बैलाडिला रेललाइन से हमारे बस्तर के आदिवासी जनता कितना विकास हुआ?

इस रेललाइन के जरिए हर दिन करोड़ों की कीमती लोहा विदेशों में भेजा जा रहा है। साम्राज्यवादियों, कार्पोरेट कंपनियों व सत्तादारी वर्गों के नजर में यह विकास हो सकता है, लेकिन यहा के मूलवासी जनता के लिए यह विकास नहीं विनाश ही है। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद कच्चे, बरबसपुर, हहालादि, चारगांव, रावघाट आमदाई खदानों को शुरू किया है. अभी कुव्वैमारी, बुधियारी जैसे सैकड़ों खदाने खोलने के लिए समझौते किये है। आमदाई खदान के बगल में 8 किमी के अंदर और 8 खदान खोलने के लिए गुप्त रूप से कारपोरेट कंपनियों को लीज में दिया है, जो स्थानीय लोगों को पता भी नहीं है। तूलाड़ पहाड़ में खदानों को खोलने के प्रक्रिया तेज किये है। ऐसे में मूलवासियों का कहां विकास संभव है।