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दलपत सागर पर हर महीने आठ से दस लाख का खर्च पर नयामुंडा की उपेक्षा लगातार जारी

शहर के दूसरे सबसे बड़े तालाब को जलीय पौधों ने जकड़ा, निगम ने महीनों से नहीं करवाई सफाई

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दलपत सागर पर हर महीने आठ से दस लाख का खर्च पर नयामुंडा की उपेक्षा लगातार जारी

तालाब में जहां नजर जाएगी वहां सिर्फ जलकुंभी ही दिखेगी

जगदलपुर। दलपत सागर हाल के वर्षों में शहर के मध्य सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बनकर उभरा है। तालाब में जलकुंभी की समस्या है जिसे दूर करने के लिए नगर निगम हर महीने आठ से दस लाख रुपए का डीजल फूंकता है। तालाब सुंदर दिखता रहे इसलिए यहां पर वीड हार्वेस्टर मशीन और जेसीबी के जरिए सफाई की जाती है। तालाब के संरक्षण के लिए निगम जैसी तत्परता दिखा रहा है उसकी खूब तारीफ हो रही है लेकिन शहर में एक ऐसा तालाब भी है जिसे निगम ने भूला दिया है। यह तालाब है गंगामुंडा तालाब। गंगामुंडा तालाब के संरक्षण को लेकर निगम की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है। तालाब को लगातार जलीय पौधे जकड़ते जा रहे हैं। यहां पर जलकुंभी की वैसी समस्या नहीं है जैसी दलपत सागर में है लेकिन जलीय पौधे तालाब का सौंदर्य बिगाड़ रहे हैं। तालाब में जहां भी नजर जाएगी सिर्फ कमल के फूल व अन्य जलीय पौधे दिखते हैं। इनकी सफाई निगम ने महीनों से नहीं करवाई है। निगम में जब भाजपा का शासन था तो तालाब को सुंदर बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। इसके लिए अगल से प्रोजेक्ट भी तैयार किया गया था लेकिन लगभग १० साल के बाद सब कुछ बेकार हो चुका है। तालाब सौंदर्यीकरण से जुड़े सारे काम कबाड़ हो चुके हैं। इस तालाब को भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना थी जो कि समय के साथ फेल हो गई। बाद में आई नगर सरकारों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया और अब तालाब उपेक्षित और बदहाल नजर आ रहा है।

कहा था- वीड हार्वेस्टर का यहां भी करेंगे उपयोग
नगर निगम की मौजूदा सरकार ने जब दलपत सागर के लिए वीड हावेस्टर मशीन की खरीदी की तो कहा था कि दलपत सागर के आलावा गंगामुंडा की सफाई का काम भी इसके माध्यम से किया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शुरुआत में कुछ समय तक वीड हावेस्टर मशीन यहां दिखाई दी बाद में उसे नियमित रूप से यहां नहीं लाया गया। जबकि दोनों जगह-बराबरी के साथ इसके उपयोग की बात कही गई थी।

सिर्फ छठ के मौके पर तालाब का कुछ हिस्सा दिखता है साफ
तालाब के आसपास उत्तर भारतीय समाज की बहुलता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सूर्य उपासना के महापर्व छठ के मौके पर इस तालाब को नगर निगम मुख्य आयोजन स्थल बनाता है। इसके तालाब में छठ से जुड़ी हर पूजा संपन्न होती। उस वक्त तालाब को १५ दिन पहले से ही साफ करवाया जाता है लेकिन जैसे ही पर्व पूरा होता तालाब को फिर उसी हाल में छोड़ दिया जाता है। इलाके के लोग कहते हैं कि छठ के दौरान भी सिर्फ घाट के आसपास ही सफाई कर रस्म अदायगी की जाती है।

निगम के पास गंगामुंडा के लिए कोई कार्ययोजना नहीं
नगर निगम के पास जिस तरह से दलपत सागर के डेवलपमेंट का प्लान है उस तरह से गंगामुंडा को लेकर कोई योजना नहीं है। तालाब पिछले लगभग ६-७ साल से इसी तरह से उपेक्षित पड़ा हुआ है। इसे भी दलपत सागर जैसा बनाने या इसे सिर्फ साथ रखने के लिए भी कोई पहल नहीं हो रही है। दलपत सागर की सफाई के लिए प्रशासन सफाई अभियान चला रहा है लेकिन यहां के लिए ऐसा कुछ भी तय नहीं किया गया है।