
देश में इस्पात उद्योग की बढ़ती जरूरतों को देखते एनएमडीसी ने लिया ये फैसला, इस तरीके से होगा उत्पादन
दंतेवाड़ा. इस्पात उद्योग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने पर जोरए परिवहन सुविधाओं में भी निवेशदेश में इस्पात उत्पादन के लिए लौह अयस्क की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी ने व्यापक योजना बनाई है। कंपनी न सिर्फ अपनी मौजूदा लौह अयस्क खदानों की उत्पादन क्षमता दो गुनी से अधिक करने जा रही है, बल्कि लौह अयस्क की निकासी के लिए रेल परिवहन समेत कई आवश्यक सुविधाओं में भी इजाफा कर रही है। इसके लिए कंपनी छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बड़ा निवेश कर रही है।
सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आगामी दो वर्षों में ही कंपनी की लौह अयस्क उत्पादन क्षमता 43 मिलियन टन से बढक़र 67 मिलियन टन प्रति वर्ष हो जाएगी। इस आशय की जानकारी कंपनी के सीएमडी और छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस श्री एन बैजेंद्र कुमार ने दी। वह गत दिवस सिंगापुर में आयोजित आयरन ओर वीक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
दुनिया भर से आए इस्पात और लौह अयस्क क्षेत्र के दिग्गजों को संबोधित करते हुए श्री एन बैजेन्द्र कुमार ने कहा कि भारत विश्व में इस्पात के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय में इस्पात उत्पादन तथा उसकी मांग छह-सात फीसदी से अधिक की मजबूत दर से बढ़ेगी जबकि चीन, जापान तथा यूरोपियन यूनियन में उत्पादन तथा उपभोग निकट भविष्य में स्थिर रहने की संभावना है। सरकार द्वारा मूलभूत सुविधाओं पर दिए जा रहे बल से इस्पात नीति, 2017 में निर्धारित लक्ष्य पूर्ण हो सकेंगे।
राष्ट्रीय इस्पात नीति में वित्त वर्ष 31 तक निर्धारित 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत तथा इस्पात उत्पादन की क्षमता में वृद्धि हो रही है। वर्तमान में इस्पात क्षेत्र में 14.15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हो रहा है। जिससे इस्पात निर्माण की क्षमता में बड़ी बढ़ोत्तरी होगी।
खनन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश
एनएमडीसी भारत का सबसे बड़ा तथा विश्व स्तर पर दसवां सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक है। इसके पास विश्व में सर्वोच्च एफई कंटेट वाला गुणवत्ता पूर्ण अयस्क है तथा भारत की बढ़ती हुई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यकता से अधिक लौह अयस्क् रिजर्व है जिसे देश में इस्पात निर्माण की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए कंपनी छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित अपनी लौह अयस्क खदानों की खनन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। साथ ही छत्तीसगढ़ स्थित बैलाडीला खदानों से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम तक एक स्लरी पाइपलाइन परियोजना पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इससे स्लरी के रूप में लौह अयस्क के परिवहन में आसानी होगी। साथ ही किरंदुल-कोतवालसा में रेल लाइन के दोहरीकरण में भी कंपनी सहयोग कर रही है। ताकि समय की बचत हो।
पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा विनियामक अनुपालन में उत्कृष्ट रिकार्ड
गौरतलब है कि देश के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी उत्पादन लागतए कर्मचारी लागत के क्षेत्र में विश्व की सबसे बेहतरीन कंपनियों में से एक है तथा इसका कार्य निष्पादन वेल, रियो टिंटो, एफएमजी जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के समतुल्य है। पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा विनियामक अनुपालन में इसका उत्कृष्ट रिकार्ड है। इसका लौह अयस्कव उत्पादन आयातित अयस्क के मुकाबले 50 . 55 फीसदी तक सस्ता है। इससे भारतीय इस्पात उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है। किसी भारतीय कंपनी के सीईओ द्वारा ऐसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रतिभागिता करने का यह पहला अवसर है। कार्यक्रम के एक भाग के रूप में सीईओ के राउंड टेबल कान्फ्रेंस के दौरान श्री एन बैजेन्द्र कुमार आईएएस ने बताया कि एक वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट के रूप में अनुभव से उन्हें एनएमडीसी के सीएमडी के रूप में कार्य करने में बहुत मदद मिली। उन्होंने कहा कि खनन कंपनी के लिए यह जरूरी है कि वह स्थानीय समुदाय का ध्यान रखे और एनएमडीसी में कार्यभार संभालने के समय से ही उन्होंने इस पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है।
सामाजिक पहलें तथा अनुपालन प्रमुख क्षेत्र
उन्होंने विख्यात अंतर्राष्ट्रीय संस्थो एंग्लो अमेरिकन की पूर्व मुख्य अधिशासी अधिकारी सुश्री सिंथिया कैरोल से इस बात पर सहमति जताई की कि किसी भी खनन कंपनी की सफलता के लिए पर्यावरण संरक्षणए सामाजिक पहलें तथा अनुपालन प्रमुख क्षेत्र हैं। उन्होंने बताया कि एनएमडीसी ने पिछले वर्ष सीएसआर के लिए प्लेट्स अवार्ड जीता है तथा इस वर्ष भी इस पुरस्कांर के लिए उसका नाम शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर के ऐसे कार्यक्रमों में एनएमडीसी को भाग लेने में खुशी होगी। इससे कंपनी का प्रचार होगा तथा निवेशकों में विश्वास पैदा होगा।
Published on:
11 May 2019 11:58 am

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