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ओडिशा पुलिस का बड़ा एक्शन! 48 हजार एकड़ अवैध गांजा नष्ट, नक्सलियों की फंडिंग पर बड़ा वार

CG Ganja Smuggler: छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा में पुलिस ने अवैध नशे के कारोबार और नक्सल नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है।

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ओडिशा पुलिस का बड़ा एक्शन! 48 हजार एकड़ अवैध गांजा नष्ट, नक्सलियों की फंडिंग पर बड़ा वार(photo-patrika)

CG Ganja Smuggler: छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा में पुलिस ने अवैध नशे के कारोबार और नक्सल नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है। 1 जनवरी 2025 से 28 फरवरी 2026 तक चले इस अभियान में पुलिस ने 48,160 एकड़ में फैली अवैध गांजा की खेती को नष्ट कर दिया, जिसकी कुल अनुमानित कीमत करीब 2,700 करोड़ रुपये आंकी गई है।

पुलिस द्वारा नष्ट की गई गांजा की खेती की कीमत करीब 1,444 करोड़ रुपये बताई गई है। यह कार्रवाई राज्य के कई संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में की गई, जहां लंबे समय से अवैध खेती संचालित हो रही थी।

CG Ganja Smuggler: 2.69 लाख किलो गांजा जब्त

अभियान के दौरान पुलिस ने 2,69,166 किलोग्राम तैयार गांजा भी जब्त किया, जिसकी बाजार कीमत लगभग 1,346 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस तरह कुल मिलाकर पुलिस ने करीब 2,700 करोड़ रुपये के नशे के कारोबार पर करारा प्रहार किया है। यह कार्रवाई सिर्फ नशे के खिलाफ नहीं, बल्कि नक्सलियों के आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा भी रही। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अवैध गांजा की खेती माओवादी संगठनों के लिए आय का प्रमुख स्रोत रही है, जिस पर अब सीधा असर पड़ा है।

संवेदनशील जिलों में 50% तक कमी

गजपति, रायगढ़ और कोरापुट जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में गांजा की खेती में लगभग 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां यह नेटवर्क 12 जिलों में सक्रिय था, अब यह घटकर 2-3 जिलों तक सीमित हो गया है। पुलिस की इस कार्रवाई में अवैध खेती को नष्ट करना, तस्करी पर लगाम लगाना और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाना शामिल रहा। लगातार ऑपरेशन चलाकर माओवादी संगठनों की फंडिंग को कमजोर किया गया, जिससे उनके प्रभाव में भी कमी आई है।

‘दोहरा प्रहार’ साबित हुआ अभियान

इस पूरी कार्रवाई को ‘दोहरा प्रहार’ माना जा रहा है- एक तरफ नशे के कारोबार पर कड़ा वार और दूसरी ओर नक्सलियों की फंडिंग पर चोट। इससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है। हालांकि इस अभियान को बड़ी सफलता मिली है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि अभी भी अवैध खेती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसके लिए लगातार निगरानी, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और तस्करी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।