
मेकाज के तीसरे फ्लोर में शिफ्ट किया गया पीडियाट्रिक, बर्न और टीबी वार्ड, बेहतर स्वास्थ्य को देखते हुए लिया फैसला
Medical college Jagdalpur: कोरोना संक्रमण का खतरा अब पूरी तरह से खत्म हो गया है। ऐसे में अब मेडिकल कॉलेज में फिर से पुरानी व्यवस्था लौट रही है। कोविड वार्ड बनाने के लिए जिन वार्डों को प्रभावित किया गया था यानी उनके बेड कम किए गए थे उन्हें अब फिर से पुराने स्वरूप में लाया जा रहा है।
अभी पीडियाट्रिक, बर्न और टीबी वार्ड को पुराने स्वरूप में ला दिया गया है। इन्हें फिर से तीसरे फ्लोर में शिफ्ट कर दिया गया है। गौरतलब है कि कोरोनाकाल के दौरान जब कोविड वार्ड बनाया गया था तो इन वार्डों के बेड को भी आधा कर दिया गया है। अब इन वार्डों की वापसी के साथ ही बेड भी पुराने समय की तरह बढ़ा दिया गया है। मेकाज प्रबंधन का कहना है कि कोरोना संक्रमण की तीव्रता को देखते हुए बेहतर स्वास्थ्य सेवा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
ऐसी थी पहले स्थिति
गौरतलब है कि कोरोना संक्रमणकाल के दौरान पीडियाट्रिक वार्ड को दूसरे माले में शिफ्ट किया गया था। वहीं बेड की संख्या भी घटाकर आधी कर दी गई थी। इस नए वार्ड में बाथरूम से लेकर अन्य गंदगी की वजह से लगातार परेशानी वार्ड में आ रही थी। इसी तरह बर्न वार्ड और टीबी वार्ड को फर्स्ट फ्लोर में शिफ्ट किया गया था। लेकिन अब यह तीनों वार्डों को तीसरे माले में पहले की तरह पुराने क्षमता के अनुसार शिफ्ट किया गया है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अब ज्यादा मरीजों को इसका लाभ बेहतर सुविधाओं के साथ मिलेगा।
कोविड वार्ड पूरी तरह से बंद नहीं
मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक अनुरूप साहू ने बताया कि कोविड वार्ड को पूरी तरह से बंद नहीं किया जा रहा है। लेकिन जो पहले आधे अस्पताल को कोविड वार्ड बना दिया गया था। उसे कम किया जा रहा है। करीब 50 बेड का वार्ड कोविड के लिए आगे भी तैयार रखा जाएगा। जिससे की किसी भी आपातकालीन स्थिति में इससे आसानी से निपटा जा सके। इसमें आधुनिक मशीनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है। जिसमें वेंटिलेटर से लेकर ऑक्सीजन सिस्टम तक शामिल है। उन्होंने कहा कि ज्यादा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह भी इसी दिशा में एक कदम है।
आधे मेकाज को बना दिया गया था कोविड वार्ड
कोरोना संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज के आधे अस्पताल को कोविड वार्ड बना दिया था। इसके चलते करीब-करीब सभी वार्ड प्रभावित हुए थे। मेडिसीन से लेकर टीबी वार्ड तक में 70 प्रतिशत तक बेड की संख्या कम कर दी गई थी। वहीं दूसरी तरफ कोविड वार्ड में लगातार मरीज भर्ती हो रहे थे। मेकाज की ही वजह से कोविड काल में लोगों को बेड के लिए तकलीफ नहीं हुई। इसी का नतीजा रहा कि इस दौरान महाराष्ट्र से लेकर दुर्ग तक के मरीजों का इलाज यहां किया गया। अब यह वायरस खात्मे की तरफ है तो मेकाज को भी पुराने स्वरूप में लाया जा रहा है।
Published on:
13 Nov 2022 03:42 pm

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