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Pre Wedding Shoot बैन हो.. शर्मनाक हरकतों से टूट रहे हैं कई रिश्ते, महिलाओं ने की मांग

Pre Wedding Shoot: ऐसे आयोजनों से एक ओर परिवार में खर्च का बोझ बढ़ता है वहीं दूसरी ओर निजी फोटो का सार्वजनिक होना कहीं न कहीं सभ्य समाज के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा करती है

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Pre Wedding Shoot: इन दिनों विवाह के पूर्व युवक युवतियों में प्री वेडिंग शूट का चलन बढ़ते जा रहा है। इवेंट के नाम पर शादी जैसे पवित्र बंधन के पूर्व फोटो शूट के नाम पर होने वाले पति पत्नी का अंतरंग फोटो शूट करना भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है। ऐसे आयोजनों से एक ओर परिवार में खर्च का बोझ बढ़ता है वहीं दूसरी ओर निजी फोटो का सार्वजनिक होना कहीं न कहीं सभ्य समाज के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा करती है। कुल मिलाकर कोढ़ की तरह फैल रही प्री वेडिंग शूट किसी भी हाल में शोभा नहीं देता।

Pre Wedding Shoot: रिश्तों को तार तार कर रही यह चलन

अपनी शादी को यादगार बनाने और उसे कैमरे में कैद कर सार्वजनिक स्थल में परोसने की प्रवृत्ति कहीं न कहीं भारतीय समाज में पारिवारिक रिश्तों को तार तार कर रही है। इस परंपरा को रोकना आवश्यक है ताकि विवाह के नाम पर युवक युवती द्वारा फूहड़ प्रदर्शन का विपरीत असर सभ्य समाज पर न पड़े। रविवार को प्री वेड़िंग शूट पर पत्रिका द्वारा आयोजित टॉक शो में जुटे शहर की प्रबुद्ध महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात कही।

यह भी पढ़ें: Pre Wedding Shoot: प्री वेडिंग शूट में फूहड़ता.. इस समाज ने की कड़ाई से रोक लगाने की मांग

इस तरह की कुरीतियों पर रोक लगाने के लिए रिश्ते तय करते समय दोनों पक्षों में प्री-वेडिंग जैसे प्रचलन का कड़ाई से विरोध करते हुए इस तरह की सामाजिक बुराई को बढ़ावा नहीं दिए जाने की वकालत की। महिलाओं का कहना है कि इससे शादी में होने वाले अनावश्यक खर्च पर भी कमी आएगी।

प्री वेडिंग शूट समाज के लिए खतरनाक

प्री वेडिंग समाज में वह नासूर है जिसे खत्म करने के लिए माता पिता का दखल आवश्यक है। शादी के पूर्व होने पति पत्नी के फोटो शूट के लिए मिलना जुलना हिन्दू परपरा का हिस्सा नहीं है, यही वजह है कि इसका व्यापक दुष्परिणाम देखने को मिल रहा है।

डॉ सुषमा झा, शिक्षाविद

भारतीय संस्कृति पर हो रहा आघात

शादी के पूर्व प्री वेडिंग शूट के नाम पर इस तरह के अंतरंगता वाले फोटो सार्वजनिक समारोह के बीच लगाना कहीं न कहीं हमारी भारतीय संस्कृति पर चोट करने जैसा है। विवाह एक पवित्र बंधन है। पति पत्नी के रिश्तों का फूहड़ प्रदर्शन किसी भी हाल में सही नहीं है।

करमजीत कौर, अध्यक्ष कादंबरी संस्था

सादगी के साथ हो शादी

विवाह जैसे बंधन को यादगार बनाने के लिए युवाओं में प्री वेडिंग शूट का चलन बढ़ा है। इस आयोजन के दौरान भारतीय संस्कृति का याल रखते हुए पारंपरिक परिधानों का उपयोग हो। शूटिंग के लिए कपल का किसी एकान्त में अकेले न जाकर माता-पिता के साथ करें तो इस तरह के शूटिंग में कोई बुराई नहीं है।

प्रियंका सोनी, शिक्षिका

अपने पैरों में कुल्हाड़ी

प्री वेडिंग शूट को कई लोग स्टेटस सिंबल मानने लगे हैं। इसका तरीका हमारी संस्कृति के अुनरूप नहीं है। इससे दोनों परिवार में खर्च का अतिरिक्त बोझ आता है। इसके बोझ में कई रिश्ते टूट जाते हैं। इससे युवती की भावनाएं आहत होती है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

सुहानी शुक्ला, सोशल वर्कर, मानवता

संस्कृति का ज्ञान जरूरी

वर्तमान परिवेश में स्वच्छंदता हावी हो चुका है, संयुक्त परिवार में ऐसा नहीं होता था। अब सोशल मीडिया में रील्स देखकर उसकी नकल करने की होड़ मची है। इस तरह समाज में बढ़ रही फूहड़ता को रोकने बच्चों को भारतीय संस्कृति के साथ धार्मिक आयोजनों में शामिल किया जाना चाहिए।

मधु कुशवाहा, पूर्व प्राचार्य

शादी पूर्व मिलना गलत

भारतीय परपराओं के अनुसार प्री वेडिंग शूट गलत है। शादी से पहले युवक युवती का मिलना समाज के लिए अशोभनीय है। प्री वेडिंग शूट के बहाने एक दूसरे के करीब आना गलत हैं जो फैशन बन रही है। इस पर सभी समाज को रोक लगाना चाहिए। शुरूआत घर से होना चाहिए।

गायत्री आचार्य, काउंसलर व आकाशवाणी उदघोषिका