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साल के अंतिम चंद्रगहण पर शहर के मंदिरों के बंद रहे पट

CG News: शनिवार की रात साल का आखिरी चंद्र ग्रहण रहा।

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साल के अंतिम चंद्रगहण पर शहर के मंदिरों के बंद रहे पट

साल के अंतिम चंद्रगहण पर शहर के मंदिरों के बंद रहे पट

जगदलपुर। CG News: शनिवार की रात साल का आखिरी चंद्र ग्रहण रहा। भारत में यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण था जो आज रात लगभग 1 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर रात 2 बजकर 24 मिनट पर खत्म हो गया। यह ग्रहण अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि पर रहा। भारत में इस ग्रहण को देखे जाने के कारण शाम से ही इसका सूतक काल लगने के कारण मंदिरों के पट बंद रहे। चंद्र ग्रहण लगने पर ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक काल होने के कारण शाम 4 बजे से सूतक काल आरंभ हो गया था। सूतक के शुरू होते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गये थे। सूतक काल के दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। वहीं सूतक काल के दौरान लोगों ने मंत्रों का जाप किया। ग्रहण मोक्ष के बाद शुद्धता की।

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ग्रहण के दौरान भोजन करना अशुभ

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य और भोजन करने पर पाबंदी होती है। मान्यता है कि ग्रहण काल में कोई व्यक्ति भोजन करता है तो उस भोजन में जितने दाने पेट के अंदर जाते है उसने वर्षों तक व्यक्ति को नरक में जाना पड़ता है। इसलिए ग्रहण काल के दौरान भोजन करने से बचना चाहिए। हालांकि बूढ़े, बीमारी व्यक्ति और बच्चों को इसमें छूट प्राप्त है। ग्रहण के 3 घंटे पहले तक यानी एक प्रहर पहले तक भोजन किया जा सकता है और जब ग्रहण पूरी तरह से खत्म हो जाए तो स्नान-पूजा आदि करके भोजन ग्रहण किया जा सकता है।

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ग्रहण लगने की वजह
पंडित दिनेश दास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की युति होती है तो इस काल में ग्रहण के रूप में माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समय-समय पर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण और अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण लगता है जबकि विज्ञान में ग्रहण एक खगोलीय घटना के रूप में देखा जाता है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध लाइन में आ जाते हैं तब चांद के ऊपर पृथ्वी की छाया पड़ती है। इसी को चंद्र ग्रहण कहा जाता है।