
माध्यमिक शाला डोड़पाल में पदस्थ दिव्यांग शिक्षक। ,माध्यमिक शाला डोड़पाल में पदस्थ दिव्यांग शिक्षक।
सुकमा . जिले में शिक्षा गुणवत्ता का दरकिनार कर अधिकारी से सांठगांठ कर शिक्षक अपना मनचाहा स्कूल आश्रम में पदस्थापना करा लेते हैं, ऐसी परिस्थितियों के बीच जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी होती है, वहां पर छात्रों का भविष्य अंधकार में चला जाता है। यहां के छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही है, वर्तमान स्थिति में किसी तरह से कक्षा आठवीं तक छात्र प्रतिवर्ष उत्तीर्ण कर लेते हैं, लेकिन उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती है।
जिले के गादीरास तहसील अंतर्गत संकुल केंद्र कोर्रा के माध्यमिक शाला डोड़पाल एक दिव्यांग शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है। स्कूल में एक शिक्षक पदस्थ होने से छात्रों को अध्ययपन कार्य से लेकर संकुल बैठक व विभागीय जानकारियां बनाने की भी जिम्मेदारी होती है, इन परिस्थितियों के बीच दिव्यांग शिक्षक के लिए काफी चुनौतीपूर्ण कार्य हो जाता है, क्योंकि उन्हें इन सभी कार्यों के साथ-साथ छात्रों को भी पढ़ाने की जिम्मेदारी है। इस सभी कार्य को करने की वजह से उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है, क्योंकि उन्हें संकुल बैठक में विभाग की जानकारी इत्यादि समय पर प्रस्तुत करना होता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार माध्यमिक शाला डोडपाल में अप्रैल 2022 तक 2 शिक्षकों की नियुक्ति थी, जिसमें से एक शिक्षक की नई नियुक्ति होने से वह शिक्षक त्यागपत्र देकर चला गया। जिसके बाद उक्त संस्थान में अभी एक ही शिक्षक पदस्थ है। इस बीच 28 जनवरी 2022 में जिले के शिक्षकों को पदोन्नति की सूची आई थी। कार्यालय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बस्तर जिला जगदलपुर छग से 28 जनवरी 2022 को बा.आ. कोयाबेकुर में पदस्थ शिक्षिका सरस्वती कोर्राम को पदोन्नति के बाद नवीन पदस्थापना डोड़पाल माध्यमिक शाला में प्रधानाध्यापिका के पद पर हुआ। जबकि शिक्षिका बालिका आश्रम लेंडीरास में जुलाई 2020 से शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। पदोन्नति आदेश के बाद शिक्षिका ने डोड़पाल माध्यमिक शाला में जॉइनिंग ली। शिक्षिका ने डोड़पाल माध्यमिक शाला से पुन: बालिका आश्रम लेंडीरास में अधीक्षिका के पद पर आगमी आदेश तक बनने रहने के लिए नया आदेशा डोड़पाल माध्यमिक शाला में पत्र देकर भारमुक्त करवा लिया।
कलेक्टर को आवेदन के बाद में भी नहीं हुई कार्रवाई - शिक्षिका को मूल संस्था में पदस्थ करने की मांग दिव्यांग शिक्षक भीमाराम वंजामी ने विकास खंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को 20 जून 2022 को आवेदन सौंपकर मूल संस्था में पदस्थ करने की मांग की है। लेकिन उसके बाद भी माध्यमिक शाला डोडपाल में पदोन्नत शिक्षिका सरस्वती कोर्राम को मूल संस्था में पदस्थ नहीं किया गया है। प्रशासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने की कार्रवाई नहीं होना सवालों के घेरे में है।
दो साल से अधीक्षिका के पद पर पदस्थ है शिक्षिका - शिक्षिका सरस्वती कोर्राम बा.आ. कोयाबेकुर से माध्यमिक शाला डोडपाल पदोन्नत किया गया। शिक्षिका ने डोडपाल में प्रधान अध्यापक के रूप में जॉइनिंग ली। जॉइनिंग के दो दिन के अंदर कार्यभार मुक्त करवाने के लिए अग्रिम आदेश का दस्तावेज प्रक्रिया पूरा करवा ली। शिक्षिका ने माध्यमिक शाला डोडपाल से पदभार मुक्त करा लिया। इस तरह से उक्त शिक्षिका बालिका आश्रम अधीक्षिका के पद पर बने रहने में ज्यादा रुचि दिखा रही है। क्योंकि इसे लाभ के पद के रूप देखा जाता है। माध्यमिक शाला डोड़पाल में कक्षा 6 वीं में 4 छात्र, कक्षा 7 वीं में निरंक व कक्षा 8वीं में 2 छात्र अध्ययनरत है। इन दो कक्षा का 12 पीरियड एक दिव्यांग शिक्षक के भरोसे हो रहा है। वहीं शिक्षा विभाग को इस पर पहल कर इन छात्रों को अन्य किसी आश्रम शाला में दाखिला करवा देना चाहिए। जिससे छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा मिल सके। इधर शिक्षा विभाग की लापरवाही की वजह से छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। शिक्षा विभाग के गैर जिम्मेदाराना कार्य को दर्शा रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी फोन भी नहीं उठाते - इस मामले में वर्जन लेने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी नितीन डड़सेना से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पूर्व भी इसी प्रकार से जिला शिक्षा अधिकारी का रवैया बना हुआ है।
सहायक आयुक्त गणेश शोरी ने बताया बालिका आश्रम लेंडीरास में उक्त शिक्षिका के बदले नई अधीक्षिका की तलाश है। जैसे ही यहां के लिए नई अधीक्षिका की नियुक्ति हो जाएगी। उसके बाद सरस्वती कोर्राम की मूल संस्था के लिए प्रभार से मुक्त कर दिया जाएगा।
Published on:
13 Oct 2022 09:31 pm
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