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एक ऐसा स्कूल जहां शिक्षक और चपरासी रहते हैं नशे में, वहां के बच्चे पढ़ाई के अलावा करते हैं हर काम

केशकाल विकासखंड (Keshkal)के प्राथमिक शाला गद्दाड़ में बच्चे (Children) ही पानी लाने से लेकर भोजन बनाने तक का काम (Food preparation) कर रहे हैं। वहीं अध्ययन कर रहे छात्रों का कहना है कि शिक्षक (Teacher) और चपरासी (Peon) प्रतिदिन शराब के नशे में रहते हैं।

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केशकाल. शिक्षा गुणवत्ता को लेकर प्रदेश सरकार सभी शासकीय स्कूलों में प्राथमिकता से बच्चों को भर्ती करा रही है तो वहीं केशकाल विकासखंड के संवेदनशील इलाके के प्राथमिक शाला गद्दाड़ में स्कूली बच्चे ही पानी लाने से लेकर भोजन बनाने तक का काम कर रहे हैं। वहीं अध्ययन कर रहे छात्रों का यह भी कहना है कि शिक्षक और चपरासी प्रतिदिन शराब के नशे में रहते हैं जिसके चलते स्कूली बच्चे पढ़ाई नही कर पा रहें हैं।  

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पढ़ाई लिखाई छोड़ स्वीपर का पूरा काम करने में जुट जाते हैंप्रदेश सरकार से लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने जुटी हुई है । सबसे ज्यादा जिला प्रशासन संवेदनशील क्षेत्र के बच्चों को स्कूल में दाखिला व बच्चों की पढ़ाई पर पुरजोर दिया जा रहा है । लेकिन केशकाल विकासखण्ड के प्राथमिक शाला गद्दाड़ में स्थिति कुछ और है। यहां प्रतिदिन स्कुली बच्चे सुबह पढऩे के लिए घर से स्कूल पहुंचते हैं लेकिन पहुंचते ही वे अपना पढ़ाई लिखाई छोड़ स्वीपर का पूरा काम करने में जुट जाते हैं। बच्चों ने यह भी बताया कि कभी-कभी तो शिक्षा आते भी नहीं और आते हैं तो 11 बजे तक चले जाते हैं । हम लोग भी अपना पढ़ लिख कर 2 बजे तक छुट्टी कर लेते हैं ।

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उक्त शिक्षक और स्वीपर के ऊपर कार्रवाई करूंगाइस विषय पर खंड शिक्षा अधिकारी ईमेल बघेल से पूछने पर बताया कि आपके द्वारा हमें यह जानकारी मिला है । मेरे द्वारा लगातार सीएससीओं का बैठक लिया जाता है। लेकिन कभी भी इस प्रकार की शिकायत नहीं मिली थी। मैं तत्काल उक्त संस्था के समस्त कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करूँगा और मैं स्वयं भी निरीक्षण करूँगा। सही पाए जाने पर उक्त शिक्षक और स्वीपर के ऊपर कार्रवाई करूंगा ।

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सब्जी नहीं सिर्फ दाल से ही चल रहा कामकेशकाल विखं के संवेदनशील क्षेत्रों के प्राथमिक शालाओं में बच्चों को मध्यान्ह भोजन के समय सब्जी नहीं मिल पा रहा है। सिर्फ दाल से ही अपना पेट भर रहे हैं। एक ओर प्रदेश सरकार सुपोषण योजना के तहत प्रति सप्ताह अंडा और दूध देने की बात कह रही है लेकिन इन इलाकों में आज भी सही तरीके से नियमों का पालन नहीं हो रहा है। स्कूली बच्चों से चर्चा पर बताया कि समूह के द्वारा इन्हें सब्जी के बदले सिर्फ दाल ही दिया जा रहा हैं ।

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सुपोषण योजना का नहीं मिल रहा लाभकुछ दिनों से लगातार प्राथमिक शाला में पढऩे वाले बच्चे आधा किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं और सभी के लिए कुछ बच्चे मध्यान्ह भोजन बनाते हैं । स्कूल में मध्यान्ह भोजन को दुरुस्त करने स्व सहायता समूह द्वारा सब्जी चावल दाल दिया जाता है। लेकिन तीन क्षेत्रों के प्राथमिक शाला में कई दिनों से बच्चे दाल ही बना रहे हैं। एक ओर प्रदेश सरकार प्रति सप्ताह अंडा देने और सप्ताह में एक बार दूध देने की बात कह रहे लेकिन इस स्कूल में सुपोषण योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा है ना ही इन बच्चों को प्रतिदिन सब्जी मिल रही है । बच्चों से पूछने पर उन्होंने बताया कि इस संस्था के शिक्षक प्रतिदिन शराब के नशे में ही रहते हैं और नशे की हालत में ही पढ़ाते हैं।