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पढि़ए ऐसे शिक्षकों की कहानी जिन्होनें सिर्फ पढ़ाई ही नहीं दूसरे हुनर में भी बच्चों को किया पारंगत, और आज वे…

Teachers Day 2019: इन्होंने शिक्षा के साथ किया कुछ अलग और बन गए खास, संभाग के ये तीन शिक्षक पढ़ाई के अलावा दूसरे हुनर में भी छात्रों को कर रहे पारंगत

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Teachers Day 2019 जगदलपुर. शिक्षक दिवस पर हम बस्तर संभाग के तीन ऐसे शिक्षक की अनुकरीणय पहल आपके सामने लेकर आएं हैं जिनकी वजह से स्कूल और पढ़ाई के प्रति छात्रों का लगाव बढ़ा है। तीनों शिक्षक प्रदेश में बाकी शिक्षकों के लिए मॉडल बन गए हैं। इनके प्रयास को एससीईआरटी ने मॉडल टीचर्स बुक में जगह दी है। इन सभी शिक्षकों के कार्यों को अब प्रदेश के अन्य स्कूलों में बतौर मॉडल के रूप में बताया जाएगा साथ ही दूसरे शिक्षकों को प्रेरित करने का काम किया जाएगा। इसमें कोंडागांव मडानार के शिक्षक शिवचरण साहू, सुकमा छिंदगढ़ के चुमेश्वर काशी और बस्तर धर्मपुर कोडेनार की रीना दत्ता शामिल हैं।

हाईस्कूल मडानार कोंडागांव के शिक्षक शिवचरण साहू स्कूल की छात्राओं को उनकी आत्मरक्षा के लिए गर्मी की छुट्टियों में रोजाना सुबह एक से दो घंटे तक लठ चलाना और कराते सीखाते हैं। छात्राएं इसमें इतना परिपक्व हो गई हैं की वे इसे खेल के रूप में सीखना शुरू कर चुकी हैं। छात्राओं के साथ ही स्कूल के छात्र भी इस खेल में शामिल हैं। पिछले वर्ष मुंगेली में आयोजित राज्यस्तरीय अखाड़ा प्रतियोगिता में स्कूल के 30 छात्रों ने मेडल हासिल किया। अब यहां पर अखाड़ा सीखने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

लाइव मॉडल बनाकर रोचक तरीके से पढ़ा रहीं छात्रों को
शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल धर्मपुर कोडेनार बस्तर की रीना दत्ता बच्चों रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए कबाड़ से मॉडल बनाकर उन्हेें लाइव जानकारी दे रही है। पेन से थर्मामीटर तो फुटबॉल से ग्लोब बनाकर छात्रों को इसकी जानकारी दी जा रही है। स्कूल के छात्र-छात्राओं को खेल-खेल में सौर मंडल, चंद्र और सुर्य ग्रहण व मौकड्रील कर भूकंप से बचने की जानकारी भी रहें है। वहीं मॉडल बनाकर हाई कोट, सुप्रीम कोट, संसद भवन व अन्य भवनों के बारे में बताया जाता है, ताकि छात्र इन्हें जल्द से समझ सकें।

बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने स्थानीय बोली में ही पढ़ाना कर दिया शुरू
शासकीय प्राथमिक स्कूल छिंदगढ़ सुकमा के चुमेश्वर काशी स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने उन्हें स्थानीय भाषा और बोली में पढ़ाना शुरू किया। इसमें छात्र आसानी से पढ़ और समझ पाते थे। इस प्रयोग में स्कूल के छात्रों ने काफी रूचि दिखाई। अब स्कूल में हर शनिवार को भाषा संगम क्लास लगाई जाती है। इसमें दुरूवा, दोरला, संनथाली, हल्बी, गोड़ी और माडी बोली के अलावा बंगाली और तेलगु भाषा की भी जानकारी दी जा रही है। यहां के छात्र एक से अधिक भाषा और बोली में बात कर लेते हैं।