
सिर चढ़ा वीआईपी कल्चर (photo source- Patrika)
Traffic Laws: शहर में वीआईपी कल्चर का असर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के बीच ‘‘खास होने’’ का दिखावा अब भी जारी है। सत्ता का रौब झाडऩे के लिए कई लोग अपने निजी वाहनों में अवैध रूप से हूटर, फ्लैशर लाइट और नाम-पद की प्लेट लगाकर सडक़ों पर घूमते नजर आ रहे हैं।
नियमों के मुताबिक केवल अधिकृत वीआईपी और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही हूटर और विशेष पहचान चिन्ह लगाने की अनुमति है, लेकिन शहर में इसका खुला उल्लंघन हो रहा है। कई पदाधिकारी बिना किसी रोक-टोक के इन नियमों की अनदेखी करते हुए खुद की राजनीतिक छवि चमकाने में लगे हुए हैं। स्थिति यह है कि प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ऐसे वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
ट्रैफिक के जानकारों का मानना है कि वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है। जब तक नियमों का पालन सभी पर समान रूप से लागू नहीं होगा, तब तक ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाना मुश्किल है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष अभियान चलाकर अवैध हूटर और नेम प्लेट वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि सडक़ों पर कानून का राज कायम हो सके।
शहर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर ऐसे वाहनों की आवाजाही आम बात हो गई है। इससे न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों में गलत संदेश भी जा रहा है कि नियम सिर्फ आम जनता के लिए ही हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति इस तरह के नियमों का उल्लंघन करे तो तत्काल चालान और कार्रवाई होती है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों के मामले में ढिलाई बरती जा रही है।
अंचल में चारपहिया वाहनों में कई तरह के नेमप्लेट लगे वाहन फर्राटा मारते हुए निकलती है किन्तु नियम विरूद्ध दौड़ रहे वाहनों की अनदेखी हो रही है। इस तरह के वाहनों में सांसद प्रतिनिधी से लेकर सरपंच पति तक वीआईपी बने हुए है। इसके अलावा पार्टी पदाधिकारियों के वाहनों में भी नेमप्लेट आम बात है।
Updated on:
21 Mar 2026 11:30 am
Published on:
21 Mar 2026 11:29 am
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