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अबूझमाड़ से लेकर शहरों तक आदिवासियों का आंदोलन जारी

बस्तर में अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण को कम किए जाने के मुद्दे पर सर्व आदिवासी समाज अबूझमाड़ से लेकर शहर तक एक दिन का महाबंद आंदोलन किया।

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सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते अदिवासी

सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते अदिवासी

बारसूर . बस्तर में अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण को कम किए जाने के मुद्दे पर सर्व आदिवासी समाज अबूझमाड़ से लेकर शहर तक एक दिन का महाबंद आंदोलन किया। यह बात गोंडवाना व आदिवासी मूल बचाओ मंच में बेचा पंचायत में आयोजित सभा में सर्व आदिवासी समाज व मूल बचाओ मंच अध्यक्ष विजेंद्र कुमार कोर्राम ने कहा। कोर्राम ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुरूप जनजातियों के जनसंख्या के आधार पर आरक्षण दिए जाने की मांग लगातार की जाती रही है जिसके एवज में 32 प्रतिशत आरक्षण मिलता रहा। बस्तर जिलों में जनसंख्या के अनुपात से यह आरक्षण व्यवस्था रही। 19 सितंबर को हाईकोर्ट के एक निर्णय में अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को कम करने के फैसले के बाद यथाशीघ्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए था इसके साथ ही कोर्ट में सरकार की तरफ से मजबूत पक्ष न रखा जाना सरकार के आदिवासी विरोधी चेहरे को प्रदर्शित करती है।
कोर्राम ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय के तुरंत बाद सचिवालय से जिला स्तर की भर्तियों में आरक्षण के नए रोस्टर के पालन के निर्देश आ जाते हैं जिससे साबित होता है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश को भूपेश बघेल नहीं नौकरशाह चला रहे हैं। विजेंद्र कोर्राम ने बताया कि 10 अक्टूबर को बेचा पंचायत जिला कोंडागांव में एक दिवस आंदोलन किया जाना था लेकिन पुलिस ने कढ़ियामेटा में शांति आंदोलन की अनुमति नहीं दी उल्टे उन्हेें नक्सली बताकर जेल भेजने का डर दिखाया। वहीं दूसरी ओर जब इस बारे में जानकारी दी गई तो नारायणपुर पुलिस द्वारा उन्हें किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं होना बताया। जबकी अबूझमाड़ में चल रही आदिवासियों की सभी ब्लाक मुख्यालयों व जिला मुख्यालय में रैली धरना और महाबंद का जगह-जगह पर किया जाना बताया। उन्होंने कहा कि समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर के ग्रामीण मौजूद थे।

विजेंद्र कोर्राम ने बताया कि पिछले सप्ताह सालेपाल निवासी बैजू सलाम को कढ़ियामेटा पुलिस ने उड़द के लिए हल चलाते समय आकर सालेपाल से उठाकर ले गए और उन्हें नक्सली बताकर जेल में बंद कर दिया गया वह निर्दोष है। बैजू सलाम एक किसान है , और उनके छोटे -छोटे बाल बच्चे हैं , सभी बच्चे ओरछा में पढाई करते हैं,जब इस बारे में उसकी बड़ी बेटी प्रिति सलाम को पता चला कि उसके पापा को पुलिस नक्सली बताकर जेल भेजा दिया गया है, तो उसने रोते हुए कहा कि उनके पापा इससे पहले भी दो बार फर्जी केस में सजा काटे चुके हैं और बाई इज्जत बरी होकर लौटे हैं। बच्चों के अच्छी शिक्षा के लिए खेती किसान कर बच्चों को पढ़ाने लगे थे। फिर से उन्हें फर्जी तरीके से नक्सली बताकर जेल भेज दिया गया है। इसकी गुहार लगाते घूम रहे बच्चों को अब आदिवासी मूल बचाओ मंच का समर्थन मिल रहा है और अब बड़े पैमाने पर जिला मुख्यालय में दो स्थानों पर आदिवासी समाज का जाम रहेगा जिसमें ओरछा चौक और नारायणपुर चौक शामिल हैं। बेचा गांव में धरना के बाद वापस एकत्र होकर रैली भी किया गया है।