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Bastar Madai Festival: 29 जनवरी से शुरू होगा बस्तर का ऐतिहासिक वार्षिक मड़ई, 84 गांवों के देवी-देवता होंगे शामिल

Bastar Madai Festival: नगर पंचायत बस्तर में 29 जनवरी से दो दिवसीय ऐतिहासिक वार्षिक मड़ई का आयोजन होगा, जिसमें रायकेरा परगना के 84 गांवों के देवी-देवता गाजा-बाजा के साथ शामिल होंगे।

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बस्तर का ऐतिहासिक वार्षिक मड़ई मेला (photo source- Patrika)

बस्तर का ऐतिहासिक वार्षिक मड़ई मेला (photo source- Patrika)

Bastar Madai Festival: बस्तर जिले में सदियों से चली आ रही मड़ई मेला की परंपरा को इस वर्ष भी भव्य रूप से निभाया जाएगा। नगर पंचायत बस्तर में ऐतिहासिक दो दिवसीय वार्षिक मड़ई का आयोजन 29 जनवरी, गुरुवार से किया जाएगा। इस पारंपरिक मेले में रायकेरा परगना के 84 गांवों के देवी-देवता, गाजा-बाजा के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु शामिल होंगे।

Bastar Madai Festival: 29 जनवरी को मेला आयोजन की सहमति

परंपरा के अनुसार नगर के पुजारीपारा स्थित मां गंगादेई मंदिर से माता की छत्र-डोली, लाट एवं देवी-देवताओं को विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात मेला स्थल तक लाया जाएगा। इस धार्मिक यात्रा में राज परिवार के सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं नगरवासी भी सहभागी होंगे।

माघ मड़ई मेला के सफल आयोजन को लेकर मां गंगादेई मंदिर परिसर में नगर पंचायत अध्यक्ष एवं मेला प्रभारी देवकी भद्रे की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में पार्षदों, वरिष्ठ नागरिकों एवं नगरवासियों की उपस्थिति में मेला आयोजन पर विस्तृत चर्चा की गई। ग्राम पुजारी विशेश्वर यादव ने माता से अनुमति लेकर 29 जनवरी को मेला आयोजन की सहमति की जानकारी दी।

इनकी रही मौजूदगी

इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक लखेश्वर कश्यप, ठिरली राम यादव, राजू ठाकुर, उदबोराम नाग, महेश मौर्य, रवि शंकर शुक्ला, अंकित पारख, समीर मिश्रा, वीरङ्क्षसह, नरङ्क्षसह नागेश, जीतेंद्र पटेल, सीताराम बघेल, बंशी कश्यप, मंगलराम, कोटवार जानकी राम बघेल सहित बड़ी संख्या में नगरवासी एवं ग्राम भोंड के ग्रामीण उपस्थित रहे।

व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा

Bastar Madai Festival: बैठक में सर्वसम्मति से मेला समिति का गठन करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष को मेला प्रभारी नियुक्त किया गया। आयोजन को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, पार्किंग, साइकिल स्टैंड, निगरानी समिति, सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित धुरवा नाचा, ओडिय़ा नाचा एवं देवी-देवताओं के आमंत्रण जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।