2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जगदलपुर

अनोखी परंपरा, बच्चे घर-घर जाकर लेते हैं अनाज और उपहार

जगदलपुर। बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ में प्रचलित छेरछेरा की अनूठी परंपरा आज भी नन्ने बच्चे संजोय हुए हैं। हम बात कर छेरछेरा पर्व की, जिसका संबंध धान की फसल से है।

Google source verification

बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ में प्रचलित छेरछेरा की अनूठी परंपरा आज भी नन्ने बच्चे संजोय हुए हैं। हम बात कर छेरछेरा पर्व की, जिसका संबंध धान की फसल से है। धान की फसल पकने के बाद छेरछेरा पर्व मनाया जाता है। बच्चे छेरछेरा पर्व में आकर्षण का केन्द्र हैं, बच्चों की टोली हाथ में झोला और बोरी लेकर निकलती है। गाजे-बाजे और नृत्य का प्रदर्शन कर घर-घर पहुंचकर छेरछेरा गीत गाते हैं। जिसके बदले लोग धान, रुपए और अन्य उपहार भेंट करते हैं। गांव ही नहीं शहर के बच्चों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह दिखाई पड़ता है। सदियों पुरानी परंपरा को बरकरार रखने में इन बच्चों की अहम भूमिका है और यह इस पर्व की खुबसूरती भी है।