राजमार्गों की दुर्दशा पर ध्यान दें केंद्र सरकार, मोटर व्हीकल एक्ट लागू करन में की गई जल्द बाजी, सबकी राय लेकर करेंगे जुर्माना राशि में बदलाव
जयपुर । सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर एक बार फिर राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। खाचरियावास का आरोप है कि मोदी सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट को तो लागू करने में जल्दबाजी दिखा दी लेकिन राष्ट्रीय राजमार्गों की सुध नहीं ली।
परिवहन मंत्री का दावा है कि देश भर में हर साल सवा लाख मौतें केवल राजमार्गों पर होती है, लेकिन सरकार को इससे मतलब नहीं है। सरकार ने केवल टोल कंपनियों के भरोसे हाइवे छोड़ रखे हैं। खाचरियावास ने मंगलवार को सचिवालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों को टोल कंपनियों के सुपुर्द कर दिया, लेकिन केंद्र का उन पर कोई कंट्रोल नहीं है।
राजमार्गों पर जगह-जगह से सड़के उखड़ी हुई है, सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढें हैं और राजमार्गों पर जगह-जगह कट खुले हुए हैं, जिससे हादसे होते हैं। खाचरियावास ने कहा कि जिन नियमों और शर्तों के तहत टोल कंपनियों को हाइवे सुपुर्द किए गए थे, उन पर वो खरी नहीं उतर रही। न तो उनके पास एंबुलेंस और न ही क्रेन।
हादसे के बाद क्रेन मंगाने के लिए भी पुलिस को फोन करके बुलाया जाता है। खाचरियावास ने कहा कि अकेले जयपुर-दिल्ली हाइवे पर पिछले चार साल में 6 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। और जिस कंपनी के पास इसका ठेका है उसे दो साल पहले ब्लैक लिस्ट किया चुका है। हैरत की बात है कि एनएचआई को कोई दूसरी कंपनी ही नहीं मिल रही।
शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले नहीं देंगे रियायत
केंद्र सरकार की ओर लागू किए कए मोटर व्हीकल एक्ट के जुर्माने की राशि को लेकर प्रताप सिंह ने कहा कि जुर्माना कितना कम किया जा सकता है। इस पर आमजन के साथ ही सभी की राय ली जा रही है। उसके बाद तय करेंगे। खाचरियावास ने कहा कि ऐसा तो नहीं है कि मोटर व्हीकल एक्ट पहले नहीं था पहले भी और जुर्माना पहले भी लगाया जाता था।
शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालक के खिलाफ पहले भी कड़ी कार्रवाई की जाती थी। उसकी गाड़ी को सीज कर थाने में खड़ा कराया जाता था। हम तो अब शराब पीकर वाहन चलाने वाले का लाइसेंस भी रद्द करने वाले हैं। तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले के खिलाफ भी पहले कड़ी कार्रवाई की जाती थी।
परिवहन मंत्री ने कहा कि अगर कोई हसबंड वाइफ बाइक पर जा रह हैं और उनके दो बच्चे उनके साथ बैठे हैं इस पर उनका हजार रुपए का चालान कर दें या उनको धमकाएं तो उन बच्चों पर इसका क्या फर्क पड़ेगा। इस पर भी विचार किया जाना चाहिए। जनता की भावनाओं और सभी की सहमति से जुर्माना राशि पर जो बेहतर होगा वो करेंगे।