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जल जीवन मिशन में एक हजार का घोटाला, मंत्री को किया जाए बर्खास्त: मीणा

- भाजपा के राज्यसभा सांसद ने सरकार पर फिर लगाए घोटाले के आरोप

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जल जीवन मिशन में एक हजार का घोटाला, मंत्री को किया जाए बर्खास्त: मीणा

जल जीवन मिशन में एक हजार का घोटाला, मंत्री को किया जाए बर्खास्त: मीणा

जयपुर. भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने एक बार फिर सरकार पर घोटाले के आरोप लगाए हैं। इस बार उन्होंने जल जीवन मिशन में घोटाले के आरोप लगाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की और जलदाय मंत्री महेश जोशी को बर्खास्त करने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की सीबीआई से जांच की मांग उठाई है, क्यों कि जल जीवन मिशन में पैसा केंद्र सरकार ने भी दिया है।

मीणा ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि जल जीवन मिशन(जेजेएम) के तहत 20 हजार करोड़ रुपए के 48 टेंडर ठेकेदारों ने अधिकारियों की मिलीभगत से पूल बनाकर ले लिए। जयपुर जिले की शाहपुरा की दो फर्मों को 900 करोड़ रुपए के टेंडर दे दिए गए, जबकि ये दोनों ही फर्में अनुभव ही नहीं रखती थी। यह साबित हो चुका था कि दोनों फर्मों ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाए हैं। इस तरह से जल जीवन मिशन में एक हजार करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। मीणा ने कहा कि वे इस मामले में थाने में शिकायत दर्ज कराएंगे और अधिकारियों के विरूद्ध सीवीसी को शिकायत करेंगे। इस मामले में एसीएस सुबोध अग्रवाल को भी कई शिकायतें दी गई, लेकिन उन्होंने इस मामले में ध्यान नहीं दिया।

केंद्र सरकार के उपक्रम के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाएमीणा ने कहा कि शाहपुरा की दोनों फर्माें ने जेजेएम के तहत टेंडर लेने के लिए केंद्र सरकार के उपक्रम इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फोरमेट की नकल करके फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार करवाए। इसी के आधार पर पीएचईडी विभाग से कार्यआदेश प्राप्त कर लिए। इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने 22 मार्च और 6 अप्रेल को पीएचईडी विभाग के अधिकारियों को ई-मेल के द्वारा इस फर्जीवाडे के बारे में सूचित किया, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने 7 जून को अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को भी पत्र लिखकर इस मामले की जानकारी दी। सभी निविदाओं में बिड से पहले साइट विजिट का प्रावधान रखा गया था, जिससे बिड करने वाली फर्मों को पूलिंग का मौका मिल गया। फर्मों को पूलिंग के चलते लागत तीस से चालीस प्रतिशत तक बढाने का मौका मिल गया। इस तथ्य को पीएचईडी विभाग की फाईनेंस कमेटी ने स्वीकृत भी कर दिया।

उधर, देर रात जलदाय विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में दावा किया गया कि 20 हजार करोड़ प्रोजेक्ट्स में निविदा दर अधिक दर आने के कारण सभी टेंडर पहले ही निरस्त कर दिए थे। गणपति ट्यूबवेल मामले में विभाग की वित्त समिति ने गुण-दोष के आधार पर और न्यूनतम दर होने के कारण प्रस्ताव अनुमोदन किया था। इरकॉन का पत्र मिला, फिर से जांच करा कर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।