जयपुर

अवैध बजरी खनन में ‘राजस्थान’ के 12 जिले टॉप पर, अधिकतर मामलों में अनुसंधान अधूरा; आखिर जांच की रफ्तार धीमी क्यों?

अवैध खनन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी कर रही है, लेकिन अनुसंधान (जांच) प्रभावी नहीं होने से खनन माफिया बेखौफ है।

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May 25, 2025
फाइल फोटो- पत्रिका

राजस्थान में बजरी की वैध खानों की कमी से बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। राज्य के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बजरी खनन माफिया हावी है। इनमें भीलवाड़ा, टोंक, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, करौली, जालोर, बालोतरा, ब्यावर जिले मुख्य हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री की ओर से ली गई समीक्षा बैठक में भी अवैध खनन का मामला उठा था। अवैध खनन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी कर रही है, लेकिन अनुसंधान (जांच) प्रभावी नहीं होने से खनन माफिया बेखौफ है।

अवैध खनन के खिलाफ पुलिस और खान विभाग की ओर से अलग-अलग मामले दर्ज किए जाते हैं। खान विभाग तो बजरी के साथ सभी प्रकार के खनिजों के अवैध खनन के मामले दर्ज कर रहा है, लेकिन पुलिस की बजरी पर ही ज्यादा नजर है। मिलीभगत के खेल में यह कार्रवाई प्रभावी साबित नहीं हो रही।

पुलिस कार्रवाई और वाहन जब्ती में अव्वल जिले

जिला प्रकरण जब्त वाहन

भीलवाड़ा 325 412

टोंक 312 314

धौलपुर 169 223

सवाईमाधोपुर 122 164

करौली 68 119

जालोर 108 132

बालोतरा 60 115

ब्यावर 47 112

इधर, खान विभाग का एक्शन, 677 मामले पकड़े

उधर, खान विभाग की ओर से बजरी के अवैध खनन को लेकर अलग से कार्रवाई की गई है। इस वर्ष अब तक राज्यभर में अवैध बजरी खनन के 677 मामले दर्ज किए हैं, इनमें से 129 प्रकरणों में एफआइआर दर्ज कराई गई है। इस दौरान 626 वाहन जब्त कर 65 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनसे 2.7 करोड़ रुपए की जुर्माना राशि वसूल की गई है।

जांच अधूरी…

पुलिस ने इस साल अब तक 1953 मामले दर्ज किए हैं। लेकिन इन मामलों में जांच की रफ्तार धीमी है। करीब 1002 मामलों में तो अभी अनुसंधान ही अधूरा चल रहा है। वहीं 25 मामलों को रफा-दफा कर एफआर दी जा चुकी है। वहीं 926 मामलों में चालान किया जा चुका है। खनन माफिया से कार्रवाई के दौरान 2749 वाहन भी जब्त किए गए हैं।

Updated on:
25 May 2025 10:28 am
Published on:
25 May 2025 09:58 am
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