
जयपुर.
देश की रक्षा में जान गंवाने वाले शहीदों को उनकी शहादत से दुनिया याद रखती है, लेकिन मालवीय नगर के एक सपूत की शहादत के बाद किए गए वायदे 19 साल बाद भी पूरे नहीं हुए हैं। कारगिल में पाकिस्तानी सेना से लोहा लेते शहीद हुए अमित भारद्वाज की प्रतिमा आज तक नहीं लग पाई है। पिछले १९ साल से शहीद की प्रतिमा का इंतजार क्षेत्रवासियों को भी है।
'...वतन पर मिटने वालों का क्या यही बाकी निशां होगाÓ सेक्टर-९ में इस शहीद की प्रतिमा का इंतजार कर रहा स्मारक कुछ यही सवाल पूछ रहा है। इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। न तो राजनेताओं के पास, जिन्होंने शहीद कैप्टन अमित भारद्वाज की प्रतिमा लगाने की लंबी-चौड़ी घोषणाएं की थी, और न ही सरकारी तंत्र के पास। बस वाहवाही लूट कर भूल गए।
गार्डन को बनाया कबाड़घर
किसी भी उद्यान में गवर्नमेंट ऑफिस नहीं चलता, लेकिन पिछले कई साल से यह थाना यहां चल रहा है। अमित भारद्वाज कारगिल युद्ध में १७ मई, १९९९ को क्षेत्र का यह जाबांज युवा अपनी प्लाटून के साथ बजरंग चौकी क्षेत्र में शहीद हो गया था। ४ जाट रेजीमेंट के कैप्टन अमित भारद्वाज का शव कारगिल युद्ध के बाद १३ जुलाई को खोजा जा सका। शहीद की अंत्येष्टि मालवीय नगर के दशहरा पार्क में १५ जुलाई को हजारों लोगों की उपस्थिति में की गई थी। आश्वासन, आश्वासन औरआश्वासन शहीद के परिजनों का कहना है कि पिछले १९ साल में चार सरकार आ चुकी हैं। जब भी नई सरकार आती है, तो सबसे पहले शहीद के स्मारक पर मूर्ति लगवाने की घोषणा करती हैं, लेकिन यह सिर्फ आश्वासन ही होता है। निगम के तत्कालीन महापौर मोहनलाल गुप्ता, शील धाभाई, अशोक परनामी सभी ने दशहरा पार्क में शहीद अमित की मूर्ति लगाने की घोषणा की थी। समाधि स्थल के चारों ओर चोरी की गाडिय़ां सेक्टर-९ स्थित दशहरा मैदान में शहीद भारद्वाज का समाधि स्थल बना हुआ है और इसी मैदान में जवाहर सर्किल थाना भी है। थाने में चोरी, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कबाड़ समाधि स्थल के आस-पास रखा हुआ है।
Published on:
26 Jul 2018 11:59 am
