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2 घंटे में ऑर्डर मिलता है, पैसा 6 महीने तक नहीं

देश में भले ही ई-गवर्नेंस और मेक इन इंडिया की बातें हो रही हो लेकिन सरकारों की कार्यशैली आज भी नहीं बदली है। इस कार्यशैली का खामियाजा अब लोगों की सेहत बिगाड़ सकता है।

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Shailendra Tiwari

Oct 31, 2015

देश में भले ही ई-गवर्नेंस और मेक इन इंडिया की बातें हो रही हो लेकिन सरकारों की कार्यशैली आज भी नहीं बदली है। इस कार्यशैली का खामियाजा अब लोगों की सेहत बिगाड़ सकता है। स्वाइन फ्लू आने पर बेकाबू हालातों में प्राइवेट लैब संचालक और किट सप्लायर्स हाथ खड़े कर सकते हैं। पिछले सीजन की जांचों और किट के पैसों का भुगतान नहीं होने पर यह चेतावनी दी जा रही है।


सरकार पर इन लैब और किट सप्लायर्स के डेढ़ करोड़ से अधिक बकाया है। इनका कहना है कि सरकार को जब किट चाहिए थे तो मात्र दो घंटे में ऑर्डर बनकर तैयार हो गया और अगले दो घंटों में सप्लाई देने के लिए कह दिया गया। वहीं जांचों का सिलसिला भी तुरंत शुरू कर दिया गया।


सीजन खत्म होने के बाद अब छह महीने से चक्कर लगा रहे हैं लेकिन भुगतान नहीं हो रहा है। प्रदेश में आउटसोर्स की गई जांचों के सरकार पर करीब डेढ़ करोड़ तथा 50 लाख रुपए किट सप्लायर्स के बकाया हैं। पैसे लेने के लिए लैब संचालक और किट सप्लायर्स स्थानीय प्रशासन से लेकर चिकित्सा मंत्री और मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।


इतना यहां बकाया

कोटा में सरकार से समझौता करने के बाद लाल लैब द्वारा 2490 रुपए में स्वाइन फ्लू की जांच की गई। जयपुर में इसी लैब द्वारा यह जांच 2500 रुपए में की गई थी। कोटा में जांचों के करीब 64 लाख बकाया है। जयपुर में भी 65 लाख रुपए बकाया है तथा उदयपुर का 8 लाख रुपए बकाया है।


इसी तरह किट सप्लाई में भी सरकार को एडवांस मंगवाना पड़ा। सुजाता सप्लायर्स का कोटा में ही करीब 24 लाख रुपए बकाया है। लाल लैब के प्रतिनिधि और सुजाता सप्लायर्स के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से लेकर चिकित्सा मंत्री तक को लिखकर दिया है।


इसलिए किए थे आउटसोर्स

जनवरी-फरवरी में बड़ी संख्या में स्वाइन फ्लू संदिग्ध सामने आए थे। इसके बाद किट कम पड़ गए थे और अधिक मरीज आने के कारण जांचें समय पर नहीं हो पा रही थी। इसे देखते हुए सरकारी अस्पतालों में जांचें नि:शुल्क कर दी गई थी तथा प्राइवेट अस्पताल से आने वाले मरीजों से 500 रुपए लिए गए थे। इसके बाद भी सीमित संसाधन होने के कारण सरकार जांचें करने में असमर्थ थी। ऐसे में प्राइवेट लैब को जांचें आउटसोर्स की गई। यही नहीं इसी तरह किट की सप्लाई भी बाधित हो गई थी। प्रदेशभर में किट कम पड़ गए थे। तब सरकार ने प्राइवेट फर्मों से किट ले लिए थे।


इधर फिर से आहट

सर्दी का दौर शुरू हो गया है। सरकार ने एक बार फिर स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। सरकारी चिकित्सालयों में जांच की व्यवस्थाएं की जा रही है। वार्ड तैयार किए जा रहे हैं। यदि सर्दी बढऩे के साथ स्वाइन फ्लू लौटता है और अधिक संख्या में मरीज सामने आते हैं तो फिर से जांच और किट सप्लाई के लिए सरकार को प्राइवेट लैब और सप्लायर्स की जरूरत पड़ेगी।


इस बारे में उच्चाधिकारियों को सूचित किया हुआ है। जल्द भुगतान के प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. गिरीश वर्मा,
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा