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बहते झरने, छाई हरियाली,झरनों में 200 फीट ऊपर से झरने में गिरता पानी

जयपुर. जोरदार बारिश के बाद कल-कल बहते झरने (200 feet above the water falls in the waterfalls) औऱ हरियाली से डांग क्षेत्र के पर्यटक स्थल आबाद होने लगे हैं।

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जयपुर

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Vinod Sharma

Aug 18, 2020

बहते झरने, छाई हरियाली,झरनों में 200 फीट ऊपर से झरने में गिरता पानी

बहते झरने, छाई हरियाली,झरनों में 200 फीट ऊपर से झरने में गिरता पानी

जयपुर. जोरदार बारिश के बाद कल-कल बहते झरने (200 feet above the water falls in the waterfalls) औऱ हरियाली से डांग क्षेत्र के पर्यटक स्थल आबाद होने लगे हैं। हजारों की संख्या में लोग झरनों का आंनद उठाने पहुंच रहे है। लेकिन पर्यटक स्थलों पर सुविधा व सुरक्षा के समुचित प्रबंध नहीं होने से हादसे की आशंका भी रहती है। करौली, सवाईमाधोपुर, भरतपुर व धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के गांवों में सैकडों की संख्या में पर्यटक स्थल है। कैलादेवी वऩ्य जीव अभ्यारण से सटे गांवों के पर्यटक स्थल भी लोगों को आकर्षित कर रहे है। इसके बाद भी इनके विकास नहीं कराया गया।


मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
करौली जिले के डांग क्षेत्र के महेश्वरा धाम, घंटेश्वर, चंबल नदी, धौलपुर की दमोह, सवाईमाधोपुर जिले के खंडार के रामेश्वर धाम, गंगापुर सिटी के धुंधेश्वर धाम भक्तों के आस्था केन्द्र है, जहां पर 150 फीट ऊंचाई से झरने बहते रहते है। उक्त स्थानों पर पहुंचने के लिए सडक ऊबड-खाबड है। रास्ते में कीचड जमा रहता है।। जिससे लोगों को पहुंचने में परेशानी होती है। पर्यटक झरनों का आनंद उठाने के लिए जैसे-तैसे पहुंच जाते है तो वहां पर बिजली-पानी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पाती है। स्वच्छ पेयजल नहीं मिलता है। लोगों को झरने के पानी से काम चलाना पडता है। इसी प्रकार पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध नहीं है। बदमाशों की हरकतों से आए दिन पर्यटकों में भय का माहौल भी रहता है। डांग क्षेत्र के गांव होने से डकैतों का आना-जाना भी उक्त स्थलों पर लग रहता है।


150 फीट से गिरता पानी
करौली जिले में महेश्वरा धाम पर 150 फीट की ऊंचाई से पानी गिरता है। यह झरना लोगों को आकर्षित करता । झरनों में छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं काफी देर तक नहाती रहती है। चारों तरफ घनघोर हरियाली छाई रहती है। पत्थर की चट्टानों के नीचे पंच मुखी शिव मंदिर है। शिवलिंग के ऊंपर दूध जैसे रंग की बूंदों से पानी टपकता रहता है। माहरेश्वरा धाम में रास्ता सही नहीं होने से भक्तों को पूजा करने के लिए रस्सी के सहारे नीचे जाना पडता है। इस कारण भक्तों के साथ हादसे की आशंका रहती है। लोगों ने सैकडों बार जनप्रतिनिधियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों से रास्ता निर्माण की मांग की, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हुई है।
जंगली जानवरों की शरण स्थली
घंटेश्वर धाम पर भक्तों का सैलाब उमता रहता है। जंगल में स्थित घंटेश्वर धाम के आस-पास जंगली जानवरों की शरणस्थली व गुफाएं बनी हुई है। चारों तरफ जंगल हरा-भरा होने से पर्यटकों का मन मोह लेता है। बताया जाता है कि श्रावण मास को घंटेश्वर में स्थापित शिव मंदिर में हजारों की संख्या में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते है। इस पर्यटन स्थल को विकसित करने किए केद्र में यूपीए सरकार के दौरान चट्टानी रास्तों से निजात दिलाने के लिए सीढियों का निर्माण कराया तब लोगों को राहत मिली थी। लेकिन अब ये सीढी क्षतिग्रस्त हो गई है। इनकी मरम्मत भी लम्बे समय से नहीं कराई गई है।


ये झरने व नदी कर रहे आकर्षित
सवाईमाधोपुर खंडार का रामेश्वर, गंगापुर सिटी का घुंघेश्वर, चंबल किनारे की टपका की खो व धमनिया की खो के झरनों पर काफी ऊंचाई से झरनों से पानी गिरता है। यहां पर भी पर्यटकों की भीड लगी रहती है। इसके अलावा धौलपुर की दमोह का पर्यटक स्थल लोगों का आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।


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