करीब 50 मील लंबी मानव निर्मित इस नहर में बारिश की कमी के चलते पानी लगातार कम हो रहा है, जिससे जहाजों का पारगमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसी के चलते पिछले दिनों पनामा नहर प्राधिकरण ने इससे प्रतिदिन गुजरने वाले जहाजों की संख्या 36 से घटाकर 32 कर दी है।
नई दिल्ली. पनामा नहर में पानी की भारी कमी के चलते कई देशों के 200 जहाज फंसे हुए हैं। करीब 50 मील लंबी मानव निर्मित इस नहर में बारिश की कमी के चलते पानी लगातार कम हो रहा है, जिससे जहाजों का पारगमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसी के चलते पिछले दिनों पनामा नहर प्राधिकरण ने इससे प्रतिदिन गुजरने वाले जहाजों की संख्या 36 से घटाकर 32 कर दी है। साथ ही इनका निर्धारित वजन घटाकर शुल्क भी बढ़ा दिया है। एक जहाज को नहर पार करने में लगभग 50 मिलियन गैलन ताजा पानी की आवश्यकता होती है। नहर के प्रशासनिक अधिकारी रिकोर्टे वास्क्वेज मोरालेस के मुताबिक यदि ये प्रतिबंध एक वर्ष तक रहते हैं तो इससे 20 करोड़ डॉलर से ज्यादा का नुकसान होगा। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू बनाए रखने के लिए नहर को बचाने के विकल्प खोजने होंगे।
शिपिंग कंपनियों को नुकसान
अटलांटिक और प्रशांत महासागर के दोनों किनारों पर नहर में प्रवेश के लिए अभी लगभग 20 दिन की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। इससे बचने के लिए शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक मार्गों को तलाश रही हैं, इससे उनकी लागत और अधिभार बढ़ जाएगा।
कब-कितने जहाज गुजरे
-1904 में बनना शुरू हुई थी पनामा नहर, दस वर्ष बाद 1914 में शुरू हुई
-पूर्वोत्तर एशिया से अमरीका के पूर्वी तट तक जाने वाले 40 फीसदी कंटेनर पनामा नहर से ही गुजरते हैं।
-1970 में सबसे ज्यादा 15523 जहाज पनामा नहर से गुजरे, जबकि 2016 में सबसे कम 807 जहाज गुजरे थे।
-2022 में 14239 जहाज पनामा नहर से गुजरे थे।