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Holi lunar Eclipse: धुलंड़ी पर इस बार खग्रास चंद्रग्रहण, पंचग्रही योग भी बन रहा, क्या भारत में दिखेगा इसका असर…

Holi 2026 lunar Eclipse: इस बार रंगों का त्योहार होली सिर्फ गुलाल और पिचकारियों तक सीमित नहीं रहने वाला। करीब 100 साल बाद होली के आसपास खग्रास चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसने ज्योतिष से लेकर आम लोगों तक की जिज्ञासा बढ़ा दी है। हालांकि सबसे अहम बात यह है कि यह चंद्रग्रहण […]

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एआई की मदद से तैयार तस्वीर

Holi 2026 lunar Eclipse: इस बार रंगों का त्योहार होली सिर्फ गुलाल और पिचकारियों तक सीमित नहीं रहने वाला। करीब 100 साल बाद होली के आसपास खग्रास चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसने ज्योतिष से लेकर आम लोगों तक की जिज्ञासा बढ़ा दी है। हालांकि सबसे अहम बात यह है कि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसका ज्योतिषीय प्रभाव मान्य रहेगा।

ज्योतिषाचार्य राजकुमार चतुर्वेदी और संतोष शर्मा के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि 3 मार्च को धुलंडी के दिन खग्रास चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना घटित होगी। यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। कुल मिलाकर ग्रहण की अवधि करीब 3 घंटे 27 मिनट की होगी। भले ही भारतीय आकाश में चंद्रमा ग्रहण की अवस्था में नजर न आए, लेकिन शास्त्रों के अनुसार ग्रहों की स्थिति का प्रभाव फिर भी माना जाता है।

खगोल विज्ञान के अनुसार यह खग्रास चंद्रग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य देशों में दिखाई देगा। भारत में उस समय चंद्रमा की स्थिति ऐसी होगी कि ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। इसी कारण आम लोगों में भ्रम की स्थिति भी बन रही है, जिसे विशेषज्ञ साफ कर रहे हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी दौरान पंचग्रही योग बन रहा है। शनि और बुध का नवपंचम योग बन रहा है, वहीं कुंभ राशि में बुध, शुक्र और राहु की युति से विशेष ग्रह स्थिति निर्मित हो रही है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यह संयोग कुछ राशियों के लिए आर्थिक मजबूती, पद-प्रतिष्ठा और नए अवसर लेकर आ सकता है।

ग्रहण को लेकर सूतक काल को लेकर भी चर्चा है। मान्यता के अनुसार सूतक 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 53 मिनट से माना जा रहा है। हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण कई परंपराओं में सूतक को लेकर मतभेद भी हैं। कुछ विद्वानों का कहना है कि जब ग्रहण प्रत्यक्ष न दिखे तो सूतक के नियम उतने कठोर नहीं माने जाते, जबकि कुछ लोग परंपरागत नियमों का पालन करने की सलाह देते हैं।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह ग्रहण डर का विषय नहीं है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और सकारात्मक सोच के साथ होली का उत्सव मनाना शुभ माना जाता है। रंगों के इस पर्व पर बना यह दुर्लभ संयोग आने वाले समय में बड़े बदलावों का संकेत भी दे रहा है।