
Pokhran Nuclear Test: पोकरण(जैसलमेर) पत्रिका. संपूर्ण विश्व की आंखों से सूरमा चुराते अमरीका की गुप्तचर एजेंसी सीआइए और 04 उपग्रहों की निगरानी को चकमा देते हुुए भारत ने आज से ठीक 25 साल पहले पश्चिमी सीमा के पोकरण में एक के बाद एक पांच परमाणु परीक्षण कर तहलका मचा दिया। परमाणु शक्ति संपन्नता की दादागिरी के बूूते भारत को आंख दिखाने वाले न केवल ड्रेगन(चीन) बल्कि अमरीका, जापान सहित कई देशों की पांवों से जमीन खिसक गई। उसी का परिणाम है कि आज 25 साल बाद भारत इन विश्व शक्तियों से आंख से आंख मिलाकर बात करने लगा है। ड्रेगन को आंख दिखाते हुए भारत कहता है, हमारे पास भी है पोकरण द सुपर पॉवर।
क्यों चुना पोकरण
●18 मई को 1974 में भूमिगत परमाणु परीक्षण हो चुका था।
●भोगौलिक दृष्टि से रेतीले धोरों का इलाका, जहां गहरे कुएं बनाकर किए गए थे परीक्षण्र
● रेत का कंपन होने पर भी ज्यादा नुकसान नहीं होने की स्थिति
●कम आबादी का क्षेत्र और सेना की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज यहां स्थापित
गोपनीयता
अमरीका की एजेंसी सीआइए निरंतर भारत की परमाणु परीक्षण की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। पाकिस्तान की सीमा में 04 उपग्रह स्थापित कर पश्चिमी सीमा की गतिविधियों पर नजर थी,बावजूद इसके डा. अब्दुुल कलाम के नेतृत्व की टीम ने जोधपुुर से पोकरण के बीच में सेना की वर्दी में आते-जाते हुए दुनियां को भनक तक नहीं लगने दी।
परमाणु परीक्षण टीम:
●मुख्य समन्वयक:डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख थे।
●डॉ आर चिदंबरम, परमाणु ऊर्जा आयोग और परमाणु ऊर्जा विभाग के अध्यक्ष
●डॉ लालकृष्ण संथानम; निदेशक, टेस्ट साइट तैयारी।
अन्वेषण और अनुसंधान के लिए परमाणु खनिज निदेशालय
●डॉ जी आर दीक्षितुलू; वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक
●भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) की टीम
पांच धमाके
11 व 13 मई को एक के बाद एक पांच धमाके हुए। भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी आधिकारिक घोषणा की कि हमने पोकरण में परमाणु शक्ति संपन्नता हासिल की है और पूरे विश्व में तहलका मच गया। ये थे पांच सफल परमाणु परीक्षण-
शक्ति 1
थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस
45 किलो टन , 200 किलो टन तक के लिए बनाया
शक्ति 2
प्लूटोनियम इम्प्लोजन डिजाइन
15 किलोटन एक एक बम या मिसाइल को एक वॉर-हेड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, यह डिवाइस 1974 के मुस्कुराते बुद्ध (पोकरण-1) के परीक्षा में इस्तेमाल की गई डिवाइस का एक सुधार था जिसे परम सुपर कंप्यूटर पर सिमुलेशन का उपयोग पर विकसित किया गया था।
शक्ति 3
प्रयोगात्मक लीनियर इम्प्लोजऩ डिजाइन ’’गैर-हथियार ग्रेड’’ प्लूटोनियम जो की न्यूक्लियर फिशन के लिए आवश्यक सामग्री छोड़ सकता था, यह 0.3 किलो टन का था।
शक्ति 4
एक 0.5 किलो टन की प्रयोगात्मक डिवाइस
शक्ति 5
एक 0.2 किलो टन की प्रयोगात्मक डिवाइस
Published on:
11 May 2023 03:29 pm
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