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पांच साल में राजस्थान में विकास की भेंट चढ़ा 2972 हेक्टेयर जंगल

राजस्थान वन विभाग के अधिकारी भले ही वन क्षेत्र बढ़त का दावा करते हो लेकिन राजस्थान का जंगल पिछले पांच सालों से लगातार उजड़ रहा है।

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Rajasthan Forest Area

राजस्थान वन विभाग के अधिकारी भले ही वन क्षेत्र बढ़त का दावा करते हो लेकिन राजस्थान का जंगल पिछले पांच सालों से लगातार उजड़ रहा है। राजस्थान में विकास के नाम पर 2972 हैक्टेयर जंगल विकास की भेंट चढ़ गया है। देश की अगर बात करें तो पिछले पांच साल में करीब 90 हजार हेक्टेयर जंगलों को विकास की भेंट चढ़ा दिया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें करीब 68 फीसदी वन भूमि आदिवासी बाहुल्य राज्यों से ली गई है।

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने प्राकृतिक वनस्पति वाली भूमि को विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग में लेने का सवाल किया। इस पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने लिखित जवाब दिया। इसमें बताया कि वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के प्रावधानों के तहत 1 जनवरी 2018 से 31 मार्च 2023 तक 9001 हेक्टेयर वन भूमि की अन्य विकास कार्यों के उपयोग के लिए मंजूरी दी है। वन भूमि परिवर्तन के विभिन्न प्रस्तावों के बदले प्रतिपूरक वनीकरण राज्य सरकार करती है।

पांचवी अनुसूची वाले राज्यों की जमीन अधिक
आदिवासी बाहुल्य वाले पांचवी अनुसूची में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, झारखंड, महाराष्ट्र व ओडीशा राज्य शामिल है। पिछले पांच साल में इन्हीं दस राज्यों से सबसे अधिक 68 फीसदी जंगल की जमीन विकास कार्यो के भेंट चढ़ी है।

विकास कार्यों के लिए जंगल भेंट चढ़ने वाले शीर्ष 10 राज्य
राज्य—जंगल भूमि (हैक्टेयर में)
मध्यप्रदेश 19730
ओडिशा 13304.79
अरुणाचल प्रदेश 7448.61
गुजरात 8064.76
झारखंड 4416.55
उत्तर प्रदेश 4090.64
तेलंगाना 3706.52
उत्तराखंड 3368.89
राजस्थान 2972.12
छत्तीसगढ़ 2802.38